विधानसभा में गूंजा इंदौर कुलपति का मुद्दा, राजभवन में DECISION PENDING !

विधानसभा में गूंजा इंदौर कुलपति का मुद्दा, राजभवन में DECISION PENDING !

भोपाल– मध्यप्रदेश विधानसभा में DAVV में कुलपति नियुक्ति का मुद्दा गूंजा. सदन में कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने इसका प्रश्न उठाया जिसपर मंत्री जीतू पटवारी ने कहा कि कुलपति का फैसला राज्यपाल के हाथों में है.

पूर्व कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ काे बर्खास्त किए जाने के 18 दिन बाद भी देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी काे नया कुलपति नहीं मिल सका है, जिससे यूनिवर्सिटी में सब कुछ ठप पड़ा है. इससे यूनिवर्सिटी की 55 साल की साख और सीईटी की परीक्षा देने वाले 17 हजार छात्रों का भविष्य दांव पर है. उधर, अपनी पसंद का कुलपति चुनने की होड़ में प्रदेश सरकार और राजभवन की प्रतिष्ठा पर भी सवाल उठने लगे हैं. क्योंकि प्रभारी कुलपति की जो नियुक्ति पहले ही दिन हाे जाना थी, ढाई सप्ताह बीतने के बाद भी नहीं हो पाई है. कालापीपल से कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने सदन में मुद्दा उठाया साथ ही उन्होंने राज्यपाल पर बीजेपी का एजेंट होने का भी आरोप लगाया.

सवाल यूनिवर्सिटी के संचालन के एक्ट पर भी है. यूनिवर्सिटी एक्ट 1973 में धारा-52 लगाकर कुलपति को बर्खास्त करने के बाद शासन द्वारा तीन नाम राजभवन भेजे जाने की परंपरा का जिक्र तो है, लेकिन कोई ठोस नियम नहीं है. यही वजह है कि सरकार और राजभवन के बीच टकराव की स्थिति बन गई है. वहीं कुलपति को बर्खास्त करने वाले प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी का कहना है कि इसका फैसला राज्यपाल के हाथ में है.

कुल मिलाकर अब देखना होगा कि DAVV को नया कुलपति कब तक मिलता है !

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