कर्जे में कमलनाथ सरकार, कैसे लगेगी नैया पार

कर्जे में कमलनाथ सरकार, कैसे लगेगी नैया पार

भोपालः मध्यप्रदेश में वक्त है बदलाव का नारा देकर आई कमलनाथ सरकार फिलहाल आर्थिक संकट की वजह से अपने वचन पत्र पूरा नही कर पा रही है। आर्थिक तंगी झेल रही राज्य सरकार निर्माण कार्यों के लिए भी राशि का प्रबंध नहीं कर पा रही है। इस कारण दर्जनों निर्माण कार्य अटक गए हैं। इसका असर हितग्राहीमूलक योजनाओं पर भी पड़ा है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत राशि का आवंटन न होने के कारण करीब 11 लाख परिवार मकान नहीं बना पा रहे हैं, तो भोपाल-इंदौर सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे का निर्माण भी निरस्त कर दिया गया है। राज्य सरकार नई सड़कें नहीं बना पा रही है और पुरानी सड़कों का निर्माण भी अटक गया है। ऐसे ही हालात लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, वन, लोक निर्माण, जल संसाधन सहित अन्य विभागों में हैं।

राशि के अभाव में कामकाज ठप होने से अधिकारी परेशान हैं। संबंधित विभाग लगातार वित्त विभाग को राशि के प्रस्ताव भेज रहे हैं, लेकिन वित्त अड़ंगे लगाकर प्रस्तावों को अटका रहा है। किसी भी विभाग को राशि देने से इनकार नहीं किया जा रहा है, लेकिन राशि दी भी नहीं जा रही है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई), जल संसाधन, लोक निर्माण विभाग सहित अन्य निर्माण विभागों में सैकड़ों काम अटक गए हैं। छह हजार करोड़ का इंतजाम न होने के कारण राज्य सरकार ने भोपाल-इंदौर सिक्सलेन एक्सप्रेस-वे का प्रस्ताव खारिज कर दिया। अब सरकार मौजूदा भोपाल-इंदौर मार्ग को ही सिक्सलेन बना रही है, लेकिन इसके लिए भी एक हजार करोड़ रुपए का इंतजाम नहीं हो रहा है।

सेंट्रल रोड फंड का चार हजार करोड़ रुपए केंद्र सरकार ने देने से मना कर दिया है। इसलिए राज्य सरकार बारिश में खराब हुई सड़कों की मरम्मत नहीं करा पा रही है, तो नई जिला और राज्य सड़कों का निर्माण कार्य भी ठप है। दो हजार करोड़ का इंतजाम न होने के कारण राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चयनित 11 लाख हितग्राहियों को राशि नहीं दे पा रही है। जिस कारण उनके मकान नहीं बन रहे हैं। वहीं 39 लाख नए नाम मिले हैं। इन लोगों के मकान बनवाने के लिए 48 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। राज्य सरकार मुख्यमंत्री कन्या विवाह-निकाह योजना के तहत शादी करने वाले जोड़ों को राशि नहीं दे पा रही है। दिसंबर 2018 से जुलाई 2019 के बीच प्रदेशभर में हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रमों में शादी-निकाह करने वाले करीब 20 हजार जोड़ों को 102 करोड़ रुपए दिए जाने हैं।

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