झोपड़ी में रह रही शहीद की विरांगना को रक्षाबंधन पर भाईयों ने GIFT में दिया बंगला।

झोपड़ी में रह रही शहीद की विरांगना को रक्षाबंधन पर भाईयों ने GIFT में दिया बंगला।

इंदौर- शहीद समरसता मिशन की टोली ने पूरे देश के लिए एक अद्भुद मिसाल पेश की है, जी हां इन जाबाज देश भक्त युवाओं ने स्वतंत्रता दिवस के दिन झोपड़ी नुमा घर में रह रही शहीद परिवार को न केवल सम्मान दिया है जबकि शहीद की पत्नी को रक्षाबंधन के दिन बंगला गिफ्ट किया है.

दरअसल ये कहानी है ऐसे देश भक्त नौजवानों की जिन्होंने देश के लिए एक मिसाल पेश की है. ये कहानी है ऐसे जाबांजो की जिन्होंने 27 सालों के बाद शहीद के परिवार को सम्मान दिलाया. ये कहानी है ऐसे जिद्दी युवाओं की जिन्होंने बूढ़ी लकड़ियों के सहारे खड़े जर्जर मकान से लेकर मजबूत इरादों पर खड़ी मजबूत इमारत को रिकॉर्ड समय में वीरांगना को सौंप दिया.

दरअसल ये कहानी है इंदौर जिले के पीर पीपल्या गांव की जहां सत्ताईस साल पहले इसी गांव के बांके नौजवान मोहन लाल बीएसएफ में अपनी सेवाएं देते हुए युद्ध के मैदान में शहादत दे दी, जबकि परिवार को उनका पार्थिक शरीर तक नसीब नहीं हुआ. शहीद का एक बेटा महज 3 वर्ष का था जबकि दूसरा बेटा अपने पिता को दुनिया में कदम रखने के पहले ही खो चुका था. जैसे तैसे मजदूरी कर शहीद की वीरांगना राजू बाई ने बच्चों को पाला-पोसा, उन्हें तालीम दी. लेकिन आर्थिक तंगी के चलते करीब 27 वर्षों तक झोपड़ी में रहकर गुजारा करना पड़ा…न कोई सरकारी सहायता मिली और न ही परिवार को सम्मान.

लेकिन जैसे ही इसकी जानकारी शहीद समरसता मिशन के संस्थापक एवं समाजसेवी मोहन नारायण को मिली उसी दिन उन्होंने ठान लिया की शहीद का आशियाना भी बनाएंगे साथ ही शहीद के परिवार को सम्मान भी दिलाएंगे. पूरी शहीद समरसता मिशन की टोली ने योजना बनाई जिसमे समाजसेवी विशाल राठी के नेतृत्व वन चेक वन साइन फॉर शहीद अभियान शुरू किया और रिकॉर्ड 25 दिनों में 11 लाख इकट्ठा कर करीब 1 वर्ष के अंदर यह बंगला नुमा घर शहीद की पत्नी को राखी बंधवा कर सौंप दिया. स्वतंत्रता दिवस के इस शुभ दिन युवाओं ने एक ओर जहां तिरंगा फहराया तो दूसरी ओर रक्षाबंधन के दिन राखी बंधवाकर शहीद की पत्नी को रक्षा का वचन दिया. इस दौरान भारी संख्या में मिशन से जुड़े युवा मौजूद रहे.

इस दौरान शहीद समरसता मिशन के असली हीरो एवं राजनीतिकार मोहन नारायण ने मिडिया से चर्चा के दौरान अपने अनुभव साझा किए, साथ ही उनकी आगामी कार्ययोजना के बारे में भी बताया.

वही वन चेक वन साइन फॉर शहीद के संयोजक विशाल राठी ने भी पूरी शहीद समरसता मिशन टोली को इस अद्भुत अनूठे कार्य का श्रेय दिया.

कुल मिलाकर इन युवाओं ने साबित कर दिया कि यदि समाज ठान ले तो देश में सामाजिक सहयोग से एक बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. आपको बता दे शहीद समरसता मिशन बीते 10 सालो से शहीदों के सम्मान एवं सामाजिक समरसता के लिए कार्य कर रहा है. यह उन कामो में से एक उदाहरण है.

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