अमेठी की बेटी या बेटा किसका चलेगा जादू?

अमेठी की बेटी या बेटा किसका चलेगा जादू?
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 देश – गांधी परिवार के गढ़ कहे जाने वाली अमेठी लोकसभा सीट पर दूसरी बार किस्मत आजमाने जा रहीं स्मृति इरानी के तेवर बेहद आक्रामक लग रहे हैं..आपको बता दे कि बीते चुनाव में स्मृति का मुकाबला राहुल गांधी से था स्मृति की भले ही उस चुनाव में हार का स्वाद चखा ही लेकिन जस बार चुनाव काटे की टक्कर का होने की संभावना है..

आपको बताते है देश की सबसे चर्चित सीट अमेठी की अंदरूनी सियासी समीकरण..

ये तो तय था कि कांग्रेस की पारंपरिक सीट अमेठी से लोकसभा चुनाव 2019 में भी बीजेपी स्मृति ईरानी को ही टिकट देगी. क्योंकि 2014 में स्मृति ने राहुल गांधी से टक्कर का मुकाबला किया था.

इस बार भी स्मृति ईरानी पूरी तैयारी से मैदान में उतरी हैं. सीधा मुकाबला भले ही राहुल गांधी से हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में इस बार स्मृति की तुलना प्रियंका गांधी से हो रही है. स्वाभाविक भी है. क्योंकि दोनों ही पार्टियों में प्रियंका गांधी और स्मृति ईरानी बड़े नाम हैं. लेकिन इस बार स्मृति के तेवर बेहद आक्रामक लग रहे हैं.

दरअसल,गांधी परिवार का गढ़ रहे अमेठी से राहुल गांधी 15 साल से सांसद हैं. राहुल गांधी से पहले सोनिया गांधी 1999-2004 तक यहां की सासंद रही हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी पहली बार राहुल गांधी से मुकाबला करने अमेठी पहुंची थीं. गांधी परिवार की इस परंपरागत सीट के लिए स्मृति की पहचान मोदी लहर पर सवार एक टीवी अदाकारा की ही थी.

नतीजा ये हुआ कि वो 1 लाख से ज्यादा वोटों से हार गई. राहुल गांधी को 4,08,651 वोट मिले. जबकि, स्मृति ईरानी को 3,00,748. लेकिन यह हार इसलिए अहम थी कि इस बार कांग्रेस के लिए जीत का अंतर काफी कम हो गया था.

2014 के नतीजे के बाद ही भाजपा ने तय कर दिया था कि अगले चुनाव में फिर स्मृति इरानी अमेठी से चुनाव लड़ेंगी. और तब तक अमेठी पर अपने चुनाव क्षेत्र के रूप में काम करती रहेंगी.

नतीजा ये हुआ कि अपनी राजनीतिक व्यस्तता के कारण राहुल गांधी तो अमेठी कम जाते थे, स्मृति इरानी अकसर वहां का दौरा करती रहीं.तो वही अमिठी की बेटी बन लगातार जनसंपर्क में जुटी रही…तो वही पिछले दिनों बीजेपी के कई कद्दावर नेता, और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस सीट का कई बार दौरा कर चुके हैं.

2014 में मोदी सरकार बनने के बाद से यूपी में बीजेपी का ग्राफ ऊपर ही ऊपर गया है, जबकि कांग्रेस पूरी तरह हाशिए पर चली गई है. 2019 चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन का एलान करते हुए मायावती ने कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली सीट को जिस तरह छोड़ा है, वह कांग्रेस के लिए अपमानजनक ही रहा. विपक्ष की इस तकरार का फायदा तो बीजेपी को मिलेगा ही.

सवाल सिर्फ इतना ही है कि यूपी में पार्टी के भीतर कलह झेल रही कांग्रेस के हिस्से क्या इस बार भी अमेठी में परंपरागत वोट पड़ेगा. -कुल मिलाकर प्रियंका गांधी में इंदिरा गांधी की छवि दिखती है, इस बात के लिए क्या राहुल गांधी को अमेठी से वोट मिलेगा. 2014 के चुनाव में देश में प्रमुख मुकाबला मोदी बनाम कांग्रेस था. इस बार मोदी बनाम श्अनामश् है.

हर बार कांग्रेस उम्मीदवार को विजयी बनाकर अमेठी एक प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार देती आई है. इस बार ऐसी संभावनाएं कम नजर आ रही है बहरहाल देखना दिलचस्प होगा क्या स्मृति गांधी परिवार के गढ़ में सेंध लगा पाएगी या फिर राहुल गांधी जीत का डंका बजाकर विरोधियों का मुंह बंद करेंगे…

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