दलित और स्वर्णो के संघर्ष पर संघ और भाजपा का मंथन

दलित और स्वर्णो के संघर्ष पर  संघ और भाजपा का मंथन
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भोपाल : मध्यप्रदेश में दलित, आदिवासी और स्वर्णो की नाराजगी ने सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी है. अपने हक़ की बात को लेकर ये समुदाय संघर्ष पर उतर आए. चुनावी साल में सवर्ण और दलितों के बीच बढ़ती वैमन्स्यता शिवराज सरकार के सामने चुनौती बनकर खडी है. राजधानी भोपाल में इसे लेकर भाजपा और संघ के दिग्गजों के बीच मंथन हुआ.

शारदा विहार विद्यालय में संघ और भाजपा की इस बैठक में समन्वय बैठक में विधानसभा चुनाव से पहले उपजी चुनौतियों पर विस्तार से विचार विमर्श किया गया.

लंबे समय बाद हुई इस बैठक में पहली बार नए संघ के मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के नए क्षेत्र प्रचारक दीपक बिस्पुते और सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल मौजूद थे. वहीं भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल, सांसद प्रभात झा, राकेश सिंह, फग्गनसिंह कुलस्ते, कैलाश विजयवर्गीय सहित संघ के अनुषांगिक संघठनों के पदाधिकारी भी मौजूद थे.

करीब चार घंटे तक बैठक का सिलसिला चलता रहा. जिसमें प्रदेश के मौजूदा राजनीतिक हालातों पर चर्चा की गई. संघ नेताओं ने इस बैठक में पूछा कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति निर्मित हुई कि प्रदेश में दलित आंदोलन भड़क गया और आठ लोगों की जान चली गई. संघ ने कहा कि चाहे सवर्ण नाराज हों या दलित-आदिवासी, नुकसान भाजपा का ही होगा. ये वर्ग छिटक कर दूसरी पार्टियों के पास चला जाएगा. चुनाव से ठीक पहले बिगड़े इस माहौल को लेकर आगे सामाजिक समरसता के कार्यक्रम चलाए जाने पर सहमति बनी. सवर्ण क्यों नाराज हैं इस पर विचार किया जाए. चर्चा में तय किया गया कि जिन मुद्दों पर किसान और दलित वर्ग नाराज हैं,उस बारे में फैसले लिए जाएं.

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