बाबाओं ने ठुकराया मंत्री पद, कहा- नहीं बनाना मिनिस्टर, जानिये

बाबाओं ने ठुकराया मंत्री पद, कहा- नहीं बनाना मिनिस्टर, जानिये
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भोपाल : मध्यप्रदेश में पांच बाबाओं को मंत्री बनाये जाने का मामला गरमाया हुआ. विपक्ष से लेकर साधु संत समुदाय शिवराज सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे है. वही इस बीच आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज और नर्मदानंद महाराज ने राज्यमंत्री का दर्जा लेने से इनकार कर दिया है.

राजधानी पहुंचे नर्मदानंद महाराज ने मीडिया से चर्चा के दौरान कहा कि- मैने कभी इस पद को न तो स्वीकार किया और ना ही कभी इसे स्वीकार कर पाउंगा, इसलिए अभी ये पद त्यागता हूं. वहीं आध्यात्मिक संत भय्यू महाराज ने भी बातों-बातों में इस पद को स्वीकार करने से साफ़ इनकार कर दिया.

भय्यू महाराज का कहना है कि नर्मदा हमारी आस्था, श्रद्धा और संस्कार का प्रतीक है. नर्मदा की सेवा समाज की सेवा है. जबसे उन्हें राज्यमंत्री का पद देने की सूचना मिली तब से उन्होंने इस पद का ना तो उपयोग किया और ना ही उपभोग. मैंने मानवता की सेवा का संकल्प लिया है. उससे बड़ा कोई पद नहीं है. जो पद मन, बुद्धि को स्पर्श न करे उसका कोई अर्थ नहीं है. धार्मिक गुरुओं को पद दिए जाने के पीछे लोगों के अलग-अलग विचार हैं. मेरा मत है कि मुझे यह सम्मान देने के पीछे सरकार की मंशा मेरे समाजसेवा के कार्य को सम्मान देने की रही होगी. भय्यू महाराज के निजी सहायक ने भी स्पष्ट किया कि भय्यू महाराज ने राज्यमंत्री का पद स्वीकारने से इनकार कर दिया है.

मालूम हो कि पिछले दिनों शिवराज सरकार ने नर्मदा घोटाला यात्रा निकालने वाले कंप्यूटर बाबा सहित पांच संतो को राज्य मंत्री के दर्जे से नवाजा है. जिसके बाद से ही प्रदेश सरकार आलोचनाओं के घेरे में आ गई.

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