उपचुनावः क्या सिंधिया – तोमर में सबकुछ ठीक नहीं है ?

उपचुनावः क्या सिंधिया – तोमर में सबकुछ ठीक नहीं है ?
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भोपाल –  मध्य प्रदेश की सियासत ग्वालियर राजघराने के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगैर अधूरी है। सत्ता में चाहे कोई भी हो मगर सुर्खीयां हमेशा सिंधिया को लेकर बनती है। 15 साल के वनवास को खत्म कर कांग्रेस को राज्य में सत्ता दिलाने वाले पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्य़ के अन्य कांग्रेस नेताओं से पटरी न बैठने के कारण उसी सरकार को मात्र 15 माह में ही गिरा दिया। बीजेपी में शामिल होने के बाद से सिंधिया लगातार विभिन्न वजहों से सुर्खीयों में बने हुए हैं।

एक तरफ जहां कांग्रेस – भाजपा के बीच उपचुनाव को लेकर वीडियो वॉर जारी है, वहीं दूसरे तरफ ग्वालियर – चंबल संभाग में बीजेपी के अंदर ही घमासान मचा हुआ है। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के समर्थकों और सिंधिया समर्थकों के बीच जमकर पोस्टर वॉर देखा जा रहा है। हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के जन्मदिन के मौके पर ग्वालियर में उनके समर्थकों ने जमकर पोस्टर लगाए। इन पोस्टरों में ज्योतिरादित्य सिंधिया नदारद रहे। पोस्टरों में सिंधिया की गैरमौजूदगी ने  सियासी गलियारों में कई अटकलों को जन्म दिया है।

कमलनाथ सरकार में श्रम मंत्री रहे सिंधिया समर्थक  नेता महेंद्र सिंह सिसौदिया के समर्थकों ने गुना में एक पोस्टर लगाया है, जिसमे बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता मौजूद हैं मगर केंद्रीय मंत्री तोमर गायब हैं। इसे तोमर समर्थकों के पोस्टर का जवाब माना जा रहा है।  ये पोस्टर बमौरी विधानसभा सीट के सिंधिया समर्थक कार्यकर्ताओं की ओर से लगाया गया है। इसमें ज्योतिरादित्य सिंधिया की फोटो छायी हुई है। कहा गया है-बमौरी का हर परिवार मेरा परिवार। हम कोरोना के खिलाफ साथ मिलकर लड़ेंगे।

इस पोस्टर की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसमे सिंधिया को 2019 के लोकसभा चुनाव में करारी शिकस्त देने वाले सांसद केपी यादव को जगह दी गई है, मगर ग्वालियर चंबल में पार्टी का सबसे वरिष्ठ चेहरा नरेन्द्र सिंह तोमर गायब हैं। हालांकि बीजेपी ने पार्टी में किसी भी प्रकार के अंदरूनी मतभेदों को सिरे से नकार रही है। पार्टी का कहना है कि सिंधिया अब पूरी तरह से भाजपाई हो चुके हैं। राजनीतिक हलकों में इस बात के चर्चे हैं कि भले ही सिंधिया अपने पूरे दलबल के साथ भाजपा में शामिल हो गए हों, परंतु ग्वालियर – चंबल संभाग का भाजपाई धरा उन्हें अब भी पूरी तरह से अपनाया नहीं है।

बीते दिनों कई दिग्गज भाजपा नेताओं ने कांग्रेस का दामन थामा है। सभी ने अपने इस फैसले की वजह ज्योतिरादित्य सिंधिया को बताया है। ऐसे में अब यह देखने वाली बात होगी कि उपचुनाव के मुहाने पर खड़ी भाजपा इस पोस्टर वॉर पर कैसे लगाम लगाती है। आपको बता दें उपचुनाव का असली रण ग्वालियर – चंबल संभाग ही है क्योंकि 24 में से 16 विधानसभा की सीटें इसी क्षेत्र से आती है।

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