कर्जमाफी से कमलनाथ लिख रहे मिशन 2019 की स्क्रिप्ट !

कर्जमाफी से कमलनाथ लिख रहे मिशन 2019 की स्क्रिप्ट !
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भोपाल- कमलनाथ ने 18वें मुख्यमंत्री का पद संभालते ही किसानों की कर्जमाफी का वचन पूरा कर दिया है। कन्या-विवाह की सहायता राशि बढ़ाने और इसी तरह के कुछ अन्य लोक-लुभावन फैसले भी किए हैं। यह काम इतना आसान नहीं है लेेकिन उनकी पहल सकारात्मक है।

अब देखना यही है कि इसे जमीन पर कितनी जल्दी सही मायने में उतारा जाता है। त्वरित निर्णय लेने वाला मुख्यमंत्री अगर सही फैसले करे तो पांच साल का समय किसी भी प्रदेश की तस्वीर बदलने के लिए काफी है। कर्जमाफी ने जनता की अपेक्षाएं बढ़ा दी हैं। लोग अब उम्मीद करेंगे कि कांग्रेस वचन-पत्र का हर वादा तय समय में पूरा करे।

अगर ऐसा होता है तो यह भारतीय राजनीति में एक अलग पहल होगी। लेकिन यह करने के लिए कमलनाथ को आने वाले समय में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। प्रदेश में ये चुनौतियां राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों ही मोर्चों पर बनी हुई हैं। उनके पास समय बहुत कम है।

राहुल गांधी ने उन्हें इसी उम्मीद में सत्ता सौंपी है कि लोकसभा चुनाव में वो कांग्रेस को मध्यप्रदेश से कम से कम 20 सीटें दिलवाएंगे। अप्रैल-मई में लोकसभा चुनाव होने हैं और शिवराज सरकार की लोक-लुभावनी छवि से मुकाबले के लिए उनके पास सिर्फ फरवरी तक का समय है। क्योंकि फरवरी में ही चुनाव आचार संहिता लग जाएगी। अगर हम इन चुनौतियों को सिलसिलेवार ढंग से देखें तो कुछ इस तरह का परिदृश्य है-

शिवराज सरकार ने भावांतर और संबल जैसी योजनाएं शुरू की थीं, उन्हें इन योजनाओं का आकलन भी करना होगा। कर्जमाफी के बाद अगर ये योजनाएं जारी रहती हैं तो सरकार गहरे आर्थिक संकट में फंस सकती है। अगर योजनाएं बंद होती हैं तो कुशल राजनीतिक प्रबंधन से किसानों को समझाना होगा। किसानों को राहत देने के लिए बिजली बिल आधा करने का फैसला भी अपने आप में महत्वपूर्ण है। हालांकि सरकार फिलहाल इसे लागू करेगी इसमें संदेह है। इसी तरह इंदिरा गृह ज्योति योजना के तहत सौ यूनिट बिजली सौ रुपए में देने का वचन भी है।

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