मीडिया को 3 अरब के विज्ञापन देकर पटवारी के इस सवाल पर घिरी सरकार, जानिए

मीडिया को 3 अरब के विज्ञापन देकर पटवारी के इस सवाल पर घिरी सरकार, जानिए
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भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा सत्र में इन दिनों गहमा गहमी का माहौल है. जनसंपर्क मंत्रालय द्वारा मीडिया संस्थानों को दिए जाने वाले विज्ञापनों के सवाल पर सत्तापक्ष और विपक्ष आमने सामने है. राऊ से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी इस मुद्दे को लेकर लगातार भाजपा पर हमला बोल रहे है तो वही सरकार इस मामले में सही जानकारी देने से बचती हुई नजर आ रही है.

राऊ से कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने सरकारी योजनों के प्रचार प्रसार में मीडिया संस्थानों को दिए जाने वाली राशि की जानकारी मांगी थी. जिसपर जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने जवाब देते हुए कहा कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के जरिए अपनी योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए पांच साल में तीन अरब रुपये से अधिक के विज्ञापन दिए हैं. इस मामले को लेकर विधायक पटवारी ने कहा कि नियमों की मनगढंत व्याख्या करके विधानसभा प्रश्नों को सीमित किया जा रहा है और कई सवालों को रिजेक्ट भी किया जा रहा है. पटवारी ने कहा कि अपनी नाकामियां छिपाने के लिये सरकार विधानसभा में सवालों के सही उत्तर देने से बच रही है.

सवालों के सही उत्तर नहीं देने के बावजूद जीतू पटवारी के एक प्रश्न पर सरकार द्वारा दिए गये जवाब पर सरकार ही बुरी तरह घिर गई जिसके बाद अब इस मामले को दबाने के लिए पूरी सरकार पटवारी पर निशाना साध रही है लेकिन यह मामला सरकार के गले की हड्डी बन गया है.

क्या है मामला ?
बता दे कि कांग्रेस विधायक जीतू पटवारी ने सरकार से पूछा कि पिछले 5 वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार और विशेष अवसरों के प्रचार के लिए कुल कितनी राशि खर्च की गई. इसका जवाब देते हुए जनसंपर्क मंत्री डा. नरोत्तम मिश्रा ने बताया कि “बीते पांच वर्षो में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रचार पर कुल 1,19,99,82,879 रुपये की राशि खर्च की गई. डॉ. मिश्रा ने बताया, “विशेष अवसरों के प्रचार पर 1,95,43,72,353 रुपये के विज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को दिए गए.

जनसंपर्क मंत्री डा. मिश्रा द्वारा सदन में दिए गए जवाब और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को पांच वर्ष की अवधि में दिए गए विज्ञापन पर व्यय हुई राशि को जोड़ें तो वह 3,15,43,55,232 रुपये होती है. जीतू पटवारी का आरोप है कि उन्होंने उन संस्थानों की सूची मांगी थी, जिन्हें विज्ञापन जारी किए गए हैं, मगर वह सूची उपलब्ध नहीं कराई गई.

विधायक पटवारी ने सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने ऐसे मीडिया संस्थानों को फायदा पहुंचाया जो सिर्फ भाजपा के लिए पत्रकारिता करते हैं. पटवारी ने उन सभी संस्थाओं की सूची मांगी थी जिन्हे विज्ञापन दिए गए परंतु सरकार ने यह लिस्ट उपलब्ध नहीं कराई केवल इतना बताया कि 5 साल में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को 300 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए गए. सरकार की जानकारी से असंतुष्ट विधायक पटवारी भड़क गए और उन्होंने सदन में कह दिया कि- “ये चोरों की मंडली है,चोरों को विज्ञापन देते हैं, यह उत्तर नहीं दे रहे” जिसे अध्यक्ष ने विलोपित करवा दिया. जबकि अपने बयान में कहीं भी जीतू ने मीडिया शब्द का उपयोग ही नहीं किया लेकिन जनसंपर्क मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने इसे मीडिया से जोड़ते हुए सदन में पांच बार दोहराया कि “ये मीडिया को चोर कह रहे है, या इन्होंने मीडिया को चोर कहा है”.

पटवारी ने चर्चा के दौरान एक बार फिर अपनी बात कही इस बार उन्होंने कहा कि- “अंधा अंधे को रेवड़ी बांटे. जर्नलिज्म वाले परेशान है,चोरों का एक गिरोह बन गया है.. जो ओरिजनल जर्नलिज्म वाले हैं वह परेशान है”

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