प्रदेश में आचार संहिता की शुरू हुई उल्टी गिनती ,कभी हो सकती है लागु ,पार्टियों में छाए बैचेनी के बादल!

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भोपाल|आगामी विधानसभा चुनाव के लिए चुनाव आयोग की तैयारियां पूरी हो चुकी है ऐसे में आयोग कभी भी प्रदेश में आदर्श आचार संहिता लागू कर सकता है। इसको लेकर सियासी दलों में बैचेनी बढ़ती जा रही है। इस बार चुनाव आयोग मप्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़ के साथ तेलंगाना में भी चुनाव कराने की तैयारी में है। तेलंगाना में मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 9 अक्टूबर को होने जा रहा है।

यह भी कहा जा रहा है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओपी रावत मनीला दौरे पर जा रहे हैं। वे 12 अक्टूबर को वापस लौटेंगे, इसलिए इसके बाद चुनाव की तारीखों की घोषणा होगी। चुनाव की तारीखों की घोषणा को लेकर संकेत नहीं मिलने से अधिकारियों में बैचेनी है। दरअसल, अधिकारी-कर्मचारी अब आराम के मूड में आ गए हैं, इसलिए फाइलों का मूवमेंट भी कम हो गया है। बाहर से आने वाले नेता और कर्मचारियों की संख्या भी तेजी से घटी है।

कर्मचारियों पर सरकार का नहीं चुनाव आयोग का रहेगा कंट्रोल

चुनाव आयोग राज्य में चुनावों की तारीखों की घोषणा के साथ-साथ आचार संहिता भी लागू कर देता है। इसके लागू होते ही राज्य सरकार और प्रशासन पर कई बंदिश लग जाती हैं। यानि चुनाव खत्म होने तक राज्य के सरकारी कर्मचारी चुनाव आयोग के कर्मचारी बन जाते हैं और उसके दिशा-निर्देशों पर काम करने लगते हैं। चुनाव आयोग ही पावर में होता है| इस दौरान राजनीतिक पार्टी या प्रत्याशी पर निजी हमले नहीं किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी नीतियों की आलोचना हो सकती है। वोट पाने के लिए किसी भी स्थिति में जाति या धर्म आधारित अपील नहीं की जा सकती। मस्जिद, चर्च, मंदिर या दूसरे धार्मिक स्थल का इस्तेमाल चुनाव प्रचार के मंच के तौर पर नहीं किया जा सकता है। वोटरों को रिश्वत देकर, या डरा धमकाकर वोट नहीं मांग सकते। वोटिंग के दिन मतदान केंद्र के 100 मीटर के दायरे में वोटर की कन्वैसिंग करने की मनाही होती है। मतदान के 48 घंटे पहले पब्लिक मीटिंग करने की मनाही होती है। मतदान केंद्र पर वोटरों को लाने के लिए गाड़ी मुहैया नहीं करा सकते।

आचार संहिता के नियम-

1 .चार संहिता लागू होने के बाद प्रदेश में किसी नई योजना की घोषणा नहीं हो सकती। हालांकि कुछ मामलों में चुनाव आयोग से अनुमति लेने के बाद ऐसा हो सकता है। मुख्यमंत्री या मंत्री अब न शिलान्यास करेंगे न लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो। राजनीतिक दलों के आचरण और क्रियाकलापों पर नजर रखने के लिए चुनाव आयोग पर्यवेक्षक नियुक्त करता है।

2 .पार्टी या प्रत्याशी किसी समुदाय के बीच तनाव बढ़ाने का काम नहीं करेगा। वोट हासिल करने के लिए किसी भी स्थिति में जाति या धर्म का सहारा नहीं लिया जा सकता।

3 . प्रत्याशी या राजनीतिक दल रैली, जुलूस या फिर मीटिंग के लिए इजाज़त लेनी होगी। अगर इलाके में कोई पाबंदी लगी हुई है तो उसके लिए अलग से इजाज़त मिलने के बाद ही कोई आयोजन किया जा सकेगा।

4 धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल चुनाव के दौरान नहीं किया जाएगा।

5 मतदाताओं को किसी भी तरह से रिश्वत नहीं दी जा सकती। रिश्वत के बल पर वोट हासिल नहीं किए जा सकते।

6 किसी भी व्यक्ति के घर, ज़मीन, जायदाद का इस्तेमाल बिना इजाज़त चुनाव के लिए नहीं किया जाएगा

7 . नीतियों की आलोचना ज़रूर हो सकती है लेकिन किसी भी प्रत्याशी या पार्टी पर निजी हमले नहीं किए जा सकते।

8 वोटिंग के दिन मतदान केंद्र से 100 मीटर के दायरे में प्रचार नहीं किया जा सकता। मतदान के 48 घंटे पहले पब्लिक मीटिंग करने की मनाही है। मतदान केंद्रों पर -वोटरों को लाने के लिए गाड़ी मुहैया नहीं करवा सकते।

9 .पार्टियां सुनिश्चित करें कि उनके प्रत्याशी या कार्यकर्ता दूसरे लोगों की रैलियों या बैठकों में किसी तरह की कोई बाधा न पहुंचाएं।

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