दिग्विजय सिंह का मिशन 2019 शुरू,भोपाल में हुंकार भरेंगे दिग्गी राजा !

दिग्विजय सिंह का मिशन 2019 शुरू,भोपाल में हुंकार भरेंगे दिग्गी राजा !
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भोपाल | लोकसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश की नौ सीटों पर कांग्रेस ने उम्मीदवारों कि लिस्ट जारी कर दी है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह को भोपाल लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया है, जबकि राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली मिनाक्षी नटराजन को मंदसौर से प्रत्याशी बनाया गया है..जिसके बाद कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है..

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आठवीं लस्टि में 38 उम्मीदवारों के नाम जारी कएि जसिमें भोपाल लोकसभा सीट से दग्विजिय सिंह का टकिट फाइनल कर दयिा गया है. लंबे समय से इस बात की चर्चा चल रही थी कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचवि और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह राजगढ़ छोड़कर भोपाल से चुनाव लड़ें. शनविार देर रात को इस बात पर मुहर लग गई है. दिग्विजय 16 साल बाद चुनावी राजनीति में एंट्री कर रहे हैं। उन्होंने इससे पहले 2003 में मप्र विधानसभा का चुनाव लड़ा था। सत्ता गंवाने के बाद दिग्विजय ने 10 साल तक चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की थी। 2014 में कांग्रेस ने उन्हें राज्यसभा में भेजा। इस बार उन्होंने मध्यप्रदेश की किसी भी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी। यही वजह है की भाजपा के मजबूत किले को भेदने के लिए सीएम कमलनाथ ने अपना पासा फेक दिया..दिग्गी के भोपाल से चुनाव लड़ने से कांग्रेस रिचार्च लगने लगी है..

दरअसल, यह रणनीति मुख्यमंत्री कमलनाथ की है। उन्होंने कहा था कि बड़े नेताओं को मुश्किल सीटों से लड़ना चाहिए। इसके बाद ही दिग्विजय कहीं से भी लड़ने को तैयार हो गए थे। उनके भोपाल और इंदौर से लड़ने की चर्चा शुरू हुई। हालांकि, दिग्विजय की रुचि इंदौर से ज्यादा भोपाल में थी। इंदौर में उनका कोई मददगार नहीं है। भोपाल में मुस्लिम वोटर्स की ज्यादा तादाद दिग्विजय के लिए मददगार साबित हो सकती है। वही प्रदेश के जनसम्पर्क मंत्री का कहना है की दिग्विजय एक लाख वोट से जीतेंगे..
दिग्विजय के जीतने पर मध्यप्रदेश में उनके सबसे बड़े कांग्रेसी नेता होने की छवि और मजबूत होगी। एक बार फिर कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व में उनका प्रभाव बढ़ेगा। इसके ये मायने होंगे कि वे कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी ज्यादा मजबूत स्थिति में होंगे..

16 साल बाद चुनावी राजनीति में वापसी के बाद भी अगर दिग्विजय यह चुनाव हारते हैं तो कमलनाथ ही कांग्रेस के एमपी के नंबर-1 नेता बन जाएंगे। कमलनाथ सरकार और प्रदेश संगठन में दिग्विजय का दखल भी कम हो जाएगा। साथ ही दिग्विजय चुनावी राजनीति के मामले में हाशिए पर जा सकते हैं। वैसे कमलनाथ को दोनों स्थितियों में फायदा है। दिग्विजय जीते तो दिल्ली चले जाएंगे, हारे तो घर बैठेंगे।

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