धार में बेटे को 85 KM साइकिल से परीक्षा दिलवाने ले गया बुजुर्ग!

धार में बेटे को 85 KM साइकिल से परीक्षा दिलवाने ले गया बुजुर्ग!
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धार .  मध्यप्रदेश के धार जिले का एक अनोखा मामला सामने आया है, जहां 85 किमी साइकिल चलाकर मजदूर पिता शोभाराम अपने बच्चे को परीक्षा दिलाने धार स्थित परीक्षा केंद्र पहुंचे। लोग पिता के जज्बे की खूब तारीफ कर रहे हैं। दरअसल प्रदेश में रुक जाना नहीं अभियान के तहत 10वीं और 12वीं परीक्षा में असफल हुए छात्रों को एक और मौका दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में मंगलवार को गणित का पेपर था।

जिले के मनावर तहसील के शोभाराम बेटे आशीष को 10वीं की तीन विषय की परीक्षा दिलवाने धार पहुंचा। परीक्षा केंद्र उसके घर से 85 किमी दूर धार में है। कोरोना महामारी के चलते बसें बंद होने की वजह से शोभाराम अपने बेटे को लेकर 17 तारीख 12 बजे साइकिल से ही निकल पड़ा। पिता-पुत्र ने रात मांडव में गुजारी और सुबह-सुबह मांडव से रवाना हुए। धार में ठहरने की व्यवस्था न होने से तीन दिन का खाने का सामान भी अपने साथ रख लिया।

वे रात में 4 बजे मांडू से निकले और मंगलवार सुबह पेपर शुरू होने से मात्र 15 मिनट पहले 7:45 बजे परीक्षा केंद्र पहुंचे। बुधवार को सामाजिक विज्ञान का पर्चा दिया। तब तक दोनों पिता और पुत्र परीक्षा पूरी होने तक यहीं रुके है।  विद्यार्थी आशीष के पिता ने बताया कि मैं मजदूर हूं लेकिन बेटे काे ये दिन नहीं देखने दूंगा मैं मजदूरी करता हूं, लेकिन बेटे को अफसर बनाने का सपना देखा है और इसे हर कीमत पर पूरा करने का प्रयास कर रहा हूं।  वहीं धार कलेक्टर आलोक सिंह ने कहा कि शासन के द्वारा बच्चों की पढ़ाई के लिए चलाए जा रही योजनाओं से उक्त बच्चे को लाभान्वित करवाया जाएगा।

कुल मिलाकर शोभाराम जैसे गरीब एवं मेहनतकश पिता का ये जज्बा दिखाता है कि समाज के आखिरी छोड़ पर हाशिए पर रह रहा व्यक्ति भी शिक्षा के प्रति कितना जागरूक और सजग है। वहीं किसी सरकार की इससे बड़ी विफलता क्या हो सकती है जिसमे किसी बच्चे को 10वीं की परीक्षा देने के लिए 85 किमी दूर वो भी पैदल जाना पड़े। उम्मीद है सरकार का ध्यान शहरों के अलावा प्रदेश के सूदूर क्षेत्रों में शिक्षा – स्वास्थ्य जैसे मूलभूत सुविधाओँ को बेहतर करने के तरफ जाएगा।

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