टाइगर सिंधिया का शिकार करेगी गोहद की शेरनी संजू जाटव !

टाइगर सिंधिया का शिकार करेगी गोहद की शेरनी संजू जाटव !
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गोहद . मध्य प्रदेश में इन दिनों 24 सीटों पर होने जा रहे उपचुनाव को लेकर सियासी गतिविधिय़ां उफान पर है। 24 सीटों में से 16 सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ माने जाने वाले ग्वालियर – चंबल संभाग में स्थित है। ऐसे में यह इलाका इस चुनावी समर का केंद्र बिंदु बन चुका है। वहीं गोहद विधानसभा सीट इस इलाके की सबसे चर्चित सीट के तौर पर उभरी है। कांग्रेस हो या भाजपा दोनों दलों का फोकस इस समय गोहद विधानसभा उपचुनाव पर है।

एक तरफ बीजेपी से सिंधिया समर्थक रणवीर जाटव मैदान में हैं, तो दूसरी तरफ हाल ही में बीजेपी को छोड़कर कांग्रेस का दामन थामने वाली संजू जाटव क्षेत्र में पंजे के चिह्न पर हुंकार भर रही हैं।  संजू जाटव की सक्रियता से बीजेपी के पसीने छूटते नजर आ रहे है। संजू महिलाओं की आवाज बनकर मैदान में हैं। बता दें गोहद विधानसभा उपचुनाव में इस बार जातीय समीकरण की सबसे बड़ी भूमिका रहेगी। भाजपा व कांग्रेस नेता जातीय समीकरणों को केंद्र में रखकर रणनीति बना रहे हैं। कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे रणवीर जाटव उपचुनाव में भाजपा के चुनाव चिन्ह पर वोट मांग रहे होंगे। ऐसे में कांग्रेस भी कड़ी टक्कर देने के मूड में है।

लिहाजा हाल ही में कांग्रेसी बनीं संजू जाटव ने जनता के बीच पहुंचकर अभी से सियासी बिसात बिछाना शुरू कर दिया है। संजू के टिकट का ऐलान भले ही नहीं किया हो लेकिन कमलनाथ के आश्वासन के बाद वो महिलाओं के विकास की बात कहकर जनता की बीच पैठ बनाना शुरू कर दिया है। संजू जाटव ने रणवीर जाटव को टक्कर देने के लिए क्षेत्रीय जनसम्पर्क शुरू कर दिया है। उन्हें विश्वास है की सर्वे में उनका नाम जरूर आएगा और कमलनाथ उनके सपने को पूरा करेंगे। दरअसल संजू जाटव ने बीजेपी में सिंधिया के आगमन के बाद अपने भविष्य को अधर में लटका देख हाथ का साथ थामा था।

ऐसे में अब देखना होगा कि  गोहद के चुनावी मैदान में बीजेपी का कमल खिलता है या फिर कांग्रेस का हाथ एकबार फिर मजबूत होता है। वहीं ग्वालियर चंबल संभाग सिंधिया परिवार का गढ़ होने के नाते यह चुनाव सीधे तौर पर की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। ज्योतिरादित्य सिंधिया सिंधिया परिवार के पहले शख्स हैं जिन्हें चुनाव में करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। इसे उनके खत्म होते इकबाल की तरह देखा गया। लिहाजा सिंधिया उपचुनाव के माध्यम से क्षेत्र में अपना सियासी वर्चस्व साबित करना चाहेंगे।

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