एमपी में अतिथि शिक्षक हुए बदहाल, न्याय के लिए खा रहे दर – दर की ठोंकरें!

एमपी में अतिथि शिक्षक हुए बदहाल, न्याय के लिए खा रहे दर – दर की ठोंकरें!
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भोपाल . मध्य प्रदेश में अतिथि शिक्षकों के नियमितीकरण का मुद्दा हमेशा से सुर्खियों में रहा है। लगातार पूरे मध्यप्रदेश में चयनित शिक्षक संघ अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। चाहे वो शिवराज सरकार हो या कमलनाथ सरकार अतिथि शिक्षकों के हिस्से में केवल मायूसी ही आई है। 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस द्वारा उनकी मांगों को वचन पत्र में शामिल करने के बाद अतिथि शिक्षकों में एक उम्मीद जगी थी, मगर अपने डेढ़ साल के कार्यकाल में कमलनाथ अतिथि शिक्षकों से अपना वादा नहीं निभा पाए। दिसंबर जनवरी के कड़ाके की ठंड में अतिथि शिक्षकों ने भोपाल में खुले आसमाने के नीचे धरना दिया, मगर फिर भी उनकी मांगे नहीं मानी गई। अब तक कई अतिथि शिक्षक अपने मांगों को लेकर मौत को गले लगा चुके हैं। मगर फिर भी उनके हिस्से आश्वासनों के अलावा कुछ भी नहीं आय़ा है।

अतिथि शिक्षकों को अब शिवराज सरकार से बहुत उम्मीदें हैं। क्योंकि इसी मुद्दे पर ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगवात कर कमलनाथ सरकार गिरा दी। यही वजह है कि बड़ी संख्या में ग्वालियर में जय विलास पैलेसे के बाहर हाथों में  तख्तियां लेकर शिक्षक ज्योतिरादित्य सिंधिया से मिलने पहुंच रहे हैं। वहीं अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर सरकार गंवान वाली कांग्रेस अब बहाने बना रही है। उसका कहना है कि उसने अतिथि शिक्षकों के लिए पूरी कार्ययोजना बना ली थी, मगर फैसले से पहले ही उनकी सरकार गिरा दी गई।

राज्य के 75 हजार अतिथि शिक्षक और दो हजार अतिथि विद्वान जिनके कंधों पर राज्य की शिक्षा व्यवस्था को चलाने का भार है, वो आज कांग्रेस और बीजेपी के बीच एक फुटबॉल बन गए हैं। दोनों ही पक्ष एक दूसरे को कटघरे में खड़ा करने में जुटा हुआ है। वहीं अतिथि शिक्षकों को लेकर सड़क पर आने का दम दिखाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया फिलहाल इन शिक्षकों को आश्वासन देते ही नजर आ रहे हैं।

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