मोदी सरकार की राह पर कमलनाथ सरकार,50 कानून रद्द करने की तैयारी !

मोदी सरकार की राह पर कमलनाथ सरकार,50 कानून रद्द करने की तैयारी !
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भोपाल | मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार प्रदेश में 50 अनुपयोगी कानून को रद्द करने की तैयारी में है..जी हाँ मोदी सरकार की तर्ज पर सीएम कमलनाथ राज्य में ये फैसला लेने जा रहे है..जिसके लिए विधि आयोग ने करीब 350 कानूनों का अध्यन किया जिनमे से 50 अनुपयोगी कानून को रद्द करने का फैसला लिया है..
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सरकार की तर्ज पर मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार भी अनुपयोगी कानूनों को रद्द कर सकती है। राज्य विधि आयोग ने ऐसे कानूनों का अध्ययन शुरू कर दिया है। अब तक करीब 350 कानूनों का परीक्षण किया गया है। इनमें से 50 कानून वर्तमान स्थिति में अनुपयोगी पाए गए हैं। आयोग इन्हें रद्द करने के लिए राज्य सरकार को सिफारिश भेज रहा है। वर्ष 2018 में गठित हुए प्रदेश के तीसरे राज्य विधि आयोग ने अनुपयोगी पुराने कानूनों को हटाने और वर्तमान परिस्थितियों के हिसाब से नए कानून बनाने पर काम शुरू किया है। सूत्र बताते हैं कि आयोग ने प्रदेश में मौजूद एक हजार से ज्यादा कानूनों का अध्ययन शुरू किया है। अभी तक इनमें से करीब साढ़े तीन सौ कानूनों का परीक्षण किया जा चुका है, जिनमें से 50 वर्तमान स्थिति के हिसाब से अनुपयोगी पाए गए हैं। इन कानूनों की या तो अवधि समाप्त हो चुकी है या फिर वर्तमान में प्रभावी नहीं हैं, इसलिए आयोग ने इन्हें रद्द करने की सिफारिश का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है, जो अगले एक माह में राज्य सरकार को सौंपा जा सकता है।

अनुपयोगी कानून रद्द करने संबंधी ड्राफ्ट पर पहले विधि विभाग काम करेगा। विभाग यह देखेगा कि जिन कानूनों की सिफारिश की गई है, वे वाकई अनुपयोगी हो गए हैं या नहीं। यदि विभाग की जांच में भी यह कानून अनुपयोगी पाए जाते हैं तो रिपोर्ट के साथ आयोग की सिफारिश शासन को भेज दी जाएगी। इसके बाद सरकार इन कानूनों को रद्द करने का फैसला लेगी। ऐसे में द भोपाल गैस अधिनियम 1985 , द मप्र एग्रीकल्चरिस्ट लोन एक्ट 1984 ,मप्र कैटल डिसीजेज एक्ट 1934 और मप्र हॉर्स डिसीजेज एक्ट 1960,मप्र ग्रामीण ऋण विमुक्ति अधिनियम 1982 सहित अन्य कुछ और भी कानून है जो खत्म हो सकते है…

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