केंद्र सरकार द्वारा जारी नई शिक्षा नीति की जानें खास बातें!

केंद्र सरकार द्वारा जारी नई शिक्षा नीति की जानें खास बातें!
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भोपाल .  मानव संसाधन और विकास मंत्रालय की सिफारिश के बाद एचआरडी मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। ये फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में हुई कैबिनेट की बैठक में लिया गया। इसके साथ ही मोदी सरकार ने 35 साल बाद देश में नई शिक्षा नीति को भी मंजूरी दे दी है। दरअसल 35 सालों बाद आखिरकार मोदी साकार ने शिक्षा नीति में स्कूली शिक्षा में आमूलचूल सुधार का खाका तैयार किया है। जिसमें बोर्ड परीक्षा को सरल बनाने, पाठ्यक्रम का बोझ कम करने के साथ ही बचपन की देखभाल और शिक्षा पर जोर देते हुए स्कूल पाठ्यक्रम के 10 + 2 ढांचे की जगह 5 + 3 + 3 + 4 की नई पाठयक्रम संरचना लागू की जाएगी।

नई नीति में विद्यार्थियों को कौशल या व्यावहारिक जानकारियां देने तथा पांचवी कक्षा तक मातृभाषा में शिक्षा पर जोर दिया गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को नई शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी है। वही प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है, अब शिक्षा बोझ नहीं बल्कि वरदान बनेगी। इस नीति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि स्कूली शिक्षा, उच्च शिक्षा के साथ कृषि शिक्षा, कानूनी शिक्षा, चिकित्सा शिक्षा और तकनीकी शिक्षा जैसी व्यावसायिक शिक्षाओं को इसके दायरे में लाया गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य है कि छात्रों को पढ़ाई के साथ साथ किसी लाइफ स्कलि से सीधा जोड़ना है। वहीं सरकार ने तय किया है कि अब सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का कुल 6 फीसदी शिक्षा पर खर्च होगा। फिलहाल भारत की जीडीपी का 4.43 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता है। बहरहाल इसी निति का मुख्य उद्द्येश्य के साथ-साथ स्किल्ड मैनपावर तैयार करना है ताकि बेरोजगारी पर लगाम लगाई जा सके। आपको बता दें 1985 में जब तत्कालीन राजीव गांधी सरकार द्वारा नई शिक्षा नीति लाई गई थी, तो समय शिक्षा मंत्रालय का नाम बदलकर मानव संसाधन विकास मंत्रालय कर दिया गया था। जिसका उस वक्त संघ ने काफी विरोध किया था। कयोंकि संघ का मानना है कि मानव कोई संसाधन नहीं है। ऐसे में यह बदलाव लाजिमी था।

 

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