जानिए क्या है आदर्श आचार संहिता ?

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भोपाल | “आदर्श आचार संहिता” जी हां ये वो शब्द है जो हर चुनाव में हमें सुनने को मिलते है,लेकिन क्या है ये आचार संहिता? क्या होते है इसके नियम? क्यों जरुरी है चुनावो में आचार संहिता ?

चुनाव आचार संहिता या आदर्श आचार संहिता चुनाव आयोग द्वारा लागु किया जाता है,इसका उद्देश्य चुनाव सुचारु रूप से हो, ईमानदारी से हो,निष्पक्ष हो, इसके मद्देनजर चुनाव आयोग इस दौरान कुछ नियम लागु करता है इसे ही आचार संहिता कहा जाता है, मतलब साफ है चुनाव आयोग के वे निर्देश जिनका पालन चुनाव खत्म होने तक हर पार्टी और उसके उम्मीदवार को करना होता है। अगर कोई उम्मीदवार इन नियमों का पालन नहीं करता तो चुनाव आयोग उसके ख़िलाफ़ कार्रवाई कर सकता है, उसे चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है, उम्मीदवार के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज हो सकती है और दोषी पाए जाने पर उसे जेल भी जाना पड़ सकता है।

मुख्यमंत्री या मंत्री अब न तो कोई घोषणा कर सकेंगे, न शिलान्यास, लोकार्पण या भूमिपूजन। सरकारी खर्च से ऐसा आयोजन नहीं होगा, जिससे किसी भी दल विशेष को लाभ पहुंचता हो

जाने कौनसा काम नहीं करेंगे मुख्यमंत्री

-शासकीय दौरा (अपवाद को छोड़कर) नहीं करेंगे
– विवेकाधीन निधि से अनुदान या स्वीकृति यानि मुख्यनंत्री की व्यक्तिगत निधि से कोई अनुदान नहीं दे सकते है.
-मुख्यमंत्री परियोजना या योजना की आधारशिला इस दौरान नहीं रख सकते.
– सड़क निर्माण या पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन नहीं दे सकते
यह तो वो नियम थे जो प्रदेश के मुख्यमंत्री या मंत्रियो या सरकारी पद पर बैठे जनप्रतिनिधियों पर लागु होते है.अब निचे वो नियम है जो सत्तारूढ़ दल पर लागु होते है. जानिए सत्ताधारी दल पर कौनसे नियम लागु होते है
– किसी भी प्रकार के शासकीय दौरों के दौरान चुनाव प्रचार के कार्य न करें।
– किसी भी काम में शासकीय मशीनरी तथा कर्मचारियों का इस्तेमाल न करें।
– सरकारी विमान और गाड़ियों का प्रयोग दल के हितों को बढ़ावा देने के लिए न हो।
– विश्रामगृह, डाक-बंगले या सरकारी आवासों पर एकाधिकार नहीं हो। साथ ही इन स्थानों का प्रयोग प्रचार कार्यालय के लिए नहीं होगा।
– सरकारी धन पर विज्ञापनों के जरिये उपलब्धियां नहीं गिनवाएंगे।
– मंत्रियों के शासकीय भ्रमण पर उस स्थिति में गार्ड लगाई जाएगी जब वे सर्किट हाउस में ठहरे हों।
-मंत्री विधायक कैबिनेट की बैठक नहीं करेंगे।
-हेलीपेड पर एकाधिकार नहीं कर सकते
– किसी प्रकार के ट्रासंफर तथा नियुक्ति के प्रकरण आयोग का पूर्व अनुमोदन जरूरी इस दौरान इन सब पर रोक.

यह तो हुए नेताओ के लिए आचार संहिता के नियम आइये अब जानते है क्या है कर्मचारियों के सम्बन्ध में नियम, बता दे सरकारी कर्मचारी चुनाव होने तक चुनाव आयोग के कर्मचारी बन जाते है. जानिए पूरी जानकारी

-कोई भी शासकीय सेवक किसी भी अभ्यर्थी के निर्वाचन, मतदाता या गणना एजेंट नहीं बनेंगे।
-मंत्री यदि दौरे के समय निजी आवास पर ठहरते हैं तो अधिकारी बुलाने पर भी वहॉं नहीं जाएंगे।
– चुनाव कार्य से जाने वाले मंत्रियों के साथ नहीं जाएंगे।
– जिनकी ड्यूटी लगाई गई है, उन्हें छोड़कर सभा या अन्य राजनीतिक आयोजन में शामिल नहीं होंगे।
– राजनीतिक दलों को सभा के लिए स्थान देते समय भेदभाव नहीं करेंगे।

इस दौरान यदि किसी पार्टी को चुनावी रैली करना है तो चुनाव आयोग से परमिशन लेना होगी, और इस दौरान किसी का पुतला जलाने पर भी सख्त मनाही होती है, इसके साथ ही लाउडस्पीकर के प्रयोग पर भी चुनाव आचार संहिता लागु होती है, चुनाव की घोषणा हो जाने से परिणामों की घोषणा तक सभाओं और वाहनों में लगने वाले लाउडस्पीकर के उपयोग के लिए दिशा-निर्देश तैयार किए गए हैं। इसके मुताबिक ग्रामीण क्षेत्र में सुबह 6 से रात 11 बजे तक और शहरी क्षेत्र में सुबह 6 से रात 10 बजे तक इनके उपयोग की अनुमति होगी.

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