प्रभु केसरियानाथ के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब !

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रतलाम | रतलाम के बिबड़ौद तीर्थ पर प्रभु केसरियानाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में भक्तगण पहुंच रहे है …जहां महंगी गाड़ियों को छोड़ लोग अपने परिवार के साथ बैलगाड़ी से भक्तिगय सफर का लुफ्त उठा रहे है.

फैशन के इस ज़माने में जहां हर आदमी मर्सडीज और बीएमडबल्यू जैसी मंहगी कारों में सफर का शौक रखता है … लेकिन आज भी कई स्थानो पर परम्पराएं ऐसी है की लोग महंगी गाड़ियां छोड़, बैलगाड़ी में ख़ुशी ख़ुशी सफर करते है … बैलगाड़ी का नाम सामने आते है जहन में मौज-मस्ती और धमाल की तस्वीर उभरने लगती है … लेकिन यहां मामला थोड़ा अलग है ….बैलगाड़ी का यह सफर धार्मिक मान्यता से जुड़ा है … जी हां ये मान्यता, और परंपरा कही और नहीं बल्कि प्रदेश के रतलाम में जारी है जहां बिबड़ौद तीर्थ पर दर्शन के लोग आज भी बैलगाड़ी से ही पहुँचते है…
कहा जाता है ये परंपरा सदियों से चली आ रही है दरसअल रतलाम से ३ किमी दूर बिबड़ौद तीर्थ पर जनवरी की कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन मेला लगता है जहां बिबड़ौद तीर्थ पर प्रभु केसरियानाथ के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में रतलाम कि जनता पहुंचती है धार्मिक मान्यता है कि प्रभु केसरियानाथ का चिन्ह बैल है …इसीलिए लोग यहाँ बैलगाड़ी से पहुंचते है…

खासबात ये कि यहां लगने वाले मेले में, झूले भी परंपरागत है यहां आज भी हाथो से धकाए जाने वाले लकड़ी के झूले लगाए जाते है … जिसका लुत्फ़ लेने भी लोग यहां आते है … और बड़ी संख्या में लोग आज मेले में पहुंचे,इस मेले को लेकर महिलाओ और बच्चो में खासा उत्साह नजर आया….कहा जाता है की बिबड़ौद विराजित प्रभु केसरियानाथ जी का यह मेला सदियों से जारी है जिसमे लोगो प्रभु के दर्शन के लिए दूर- दूर से आते है ..मेले के मौके पर आज भी प्रभु केसरियानाथ जी का रत्नो से विशेष श्रृंगार किया गया जो भक्तो के आकार्षण का केंद्र बना रहा ..

कुल मिलाकर रतलाम में बैलगाड़ी से इस मेले में पहुंचने की परम्परा सदियों से जारी है ..जिसका निर्वहन खास तौर पर यहां के युवा और अन्य नागरिक कर रह रहे है, जो संस्कृति के प्रति युवाओ और शहरवासियो के समर्पण को दर्शाता है ..

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