इंदौर से किशोर दा का गहरा नाता, यहाँ इमली के पेड़ के नीचे गुनगुनाते थे!

इंदौर से किशोर दा का गहरा नाता, यहाँ इमली के पेड़ के नीचे गुनगुनाते थे!
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इंदौर: हंसमुख, मस्तमौला और दूसरों से बेहद अलग किशोर कुमार का आज जन्मदिन है. वे अपने नाम का इस तरह कुछ अलग तरीके से परिचय देते थे. प्रसिद्द फनकार और गायक रशोकि रमाकु , जी हाँ रशोकि रमाकु यानि किशोर कुमार. जिंदगी को अलमस्त तरीके से जीने वाला ये फनकार ताउम्र अपने नाम के उलटे उच्चारण की तरह उल्टा ही रहा. समझ के हर दायरे से बाहर बिलकुल निराला.

खंडवा में रहने वाले किशोर कुमार का इंदौर से दिली नाता रहा. इंदौर के क्रिस्चियन कॉलेज के स्टेज पर उनके अंदर के गीतकार ने मुकम्मल रूप लिया. खंडवा में स्कूली पढ़ाई के बाद किशोर कुमार और उनके छोटे भाई अनूप कुमार दोनों ही इंदौर के क्रिस्चियन कॉलेज में पढ़ने आ गए. वे कॉलेज में बेहद ही शर्मीले थे. स्गाइ शो के समय परदे पर ना रह कर उन्हें परदे के पीछे से गाना पसंद था. स्टेज पर शो के दौरान किशोर परदे के पीछे छिप जाया करते थे और कभी लड़की की या कभी किसी लड़के की आवाज़ निकालते थे. उन्हें अगर गाना होता था तो वे परदे के पीछे चुप कर गाना सुनाते थे.

जानकारों के अनुसार मुफ़लसी के दौर में उधार चाय पिया करते थे. ये उधार 5 रुपये 12 आना हो गया. कैंटीन वाला जब भी उनसे उधार मांगता तो किशोर मस्तमौला अंदाज़ में गाते, 5 रुपैया 12 आना, मारेगा भैया नानाना. ऐसे ही ये छेड़खानी कब गाना बन गयी पता ही नहीं चला.

लोगो के मुताबिक किशोर ने अमीर गायक होने के बाद भी कैंटीन वाले के 5 रुपैये 12 आने नहीं चुकाए. क्रिस्चियन कॉलेज के स्टेज से शुरू हुआ ये सफर गायक, संगीतकार, अभिनेता, निर्माता, लेखक जैसे अलग अलग बॉलीवुड किरदारों में ढलता गया.

दरअसल, इसी क्रिस्चियन कॉलेज में इमली का एक बड़ा पेड़ है. इसी के नीचे बैठकर किशोर सुबह सुबह घण्टों तक रियाज़ करते थे. जब रियाज़ करके उठते तो उनके आस पास दोस्तों का जमघट लग जाता था. उनके साथी उनको इसी अंदाज़ में याद करते है.

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