सावन सोमवार को रक्षाबंधन का संयोग, बाबा महाकाल की कलाई पर सजी राखी!

सावन सोमवार को रक्षाबंधन का संयोग, बाबा महाकाल की कलाई पर सजी राखी!
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उज्जैन .  विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर ज्योर्तिलिंग मंदिर में श्रावण पूर्णिमा को रक्षा बंधन पर भस्मारती के बाद सबसे पहले राखी बांधी गई। इसके साथ पुजारियों ने बाबा महाकाल को 11 हजार लड्डुओं का भोग लगाया। परंपरा के अनुसार उज्जैन में सभी त्योहार सबसे पहले महाकाल मंदिर में मनाए जाते हैं। दरअसल इस बार सावन सोमवार पर रक्षाबंधन का अद्भुत संयोग बना, लिहाजा महाकालेश्वर मंदिर को शानदार तरीके से सजाया गया। बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती की गई।

भस्मारती के पहले बाबा को जल से नहलाकर महा पंचामृत अभिषेक किया गया जिसमे दूध, दही, घी, शहद व फलो के रसो से अभिषेक हुआ। अभिषेक के बाद भांग और चन्दन से भोलेनाथ का आकर्षक श्रंगार किया गया और बाबा को भस्म चढाई गई। भस्मिभूत होने के बाद भगवान को वस्त्र धारण कराये गए और फिर झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ बाबा की भस्म आरती की गई।

रक्षाबंधन पर्व पर बाबा महाकाल को विशेष राखी बांधी गई। मान्यता है कि महाकाल की नगरी उज्जैन में हर शुभ कार्य की शुरुआत बाबा महाकाल के दरबार से होती है।  सुबह भस्मारती में श्रृंगार के बाद बाबा को राखी बांधी गई। इस मौके पर बाबा के दरबार में लुड्डुओं का महाभोग लगाया गया। इस भव्य भस्म श्रंगार और भोग के साथ महाआरती की गई।

यूं तो रक्षाबंधन की भस्मारती पर बड़ी संख्या में भक्त बाबा के दरबार में मौजूद रहते है परंतु इस बार कोरोना गाइडलाईन के चलते भस्मारती में श्रद्धालुओं के शामिल होने पर प्रतिबंध था। यहां सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत बाबा महाकाल के दरबार में पण्डे पुजारियों द्वारा सबसे पहले राखी बांधकर विश्व कल्याण और रक्षा की कामना की गई।

 

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