SC/ST एक्ट से मुश्किल में भाजपा, क्या दलित रोकेंगे PM मोदी का रास्ता ?

SC/ST एक्ट से मुश्किल में भाजपा, क्या दलित रोकेंगे PM मोदी का रास्ता ?
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DALIT-MODI

!!एमपी न्यूज़ डेस्क!! 

SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने दलित समुदाय को नाराज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर दलितों और आदिवासियों में भारी आक्रोश है. विभिन्न जगहों पर इसको लेकर विरोध-प्रदर्शन हुआ है. इस दौरान भाजपा शासित राज्यों में हिंसा भी देखने को मिली जिसे लेकर केंद्र की मोदी सरकार बुरी तरह घिर गई. फैसले की नजाकत को भांपते हुए कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों ने बिना देरी किए सरकार पर हमला बोला. हालत ऐसे है कि दलित समुदाय भजपा सरकार से खफा है जिसका असर 2019 के लोकसभा चुनाव में देखने को मिल सकता है.

वहीं अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के राजनैतिक परिणामों को देखते हुए भाजपा पसोपेश में है. वह आकलन करने में जुटी है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के लिहाज से क्या फायदेमंद हो सकता है. पार्टी का एक तबका इसको लेकर गंभीर है कि सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन दायर करके गेंद अदालत के पाले में डाल दी जाए. उनका मानना है कि अगर सरकार इस फैसले को पलटवाने की जुगत में दिखी तो उसकी परंपरागत वोटर अगड़ी जातियां नाराज हो जाएंगी.

वहीं दूसरे तबके का मानना है कि पिछले चुनावों में एससी-एसटी समुदाय अपने परंपरागत दलों को छोड़कर भाजपा की ओर मुड़ा है, अगर वे भाजपा से विमुख हुए तो अगले चुनावों में पार्टी को भारी नुक्सान हो सकता है.

SC/ST एक्ट पर बदलाव के फैसले के बाद भड़की हिंसा से सत्तारूढ़ बीजेपी बैकफुट पर आ चुकी है और डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. अब पार्टी देशभर में अंबेडकर जयंती यानी 14 अप्रैल से पांच मई तक ग्राम स्वराज अभियान चलाएगी. पीएम मोदी ने भी एक कार्यक्रम में साफ कर दिया कि उनकी सरकार भीमराव अंबेडकर के दिखाए रास्ते पर चल रही है.

बता दे कि इस साल जिन चार राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं, उनमें 231 सीटें एससी-एसटी के लिए आरक्षित हैं, वहीं लोकसभा में उनके लिए इन प्रदेशों की 25 सीटें आरक्षित हैं. ऐसे में अगर प्रदेश सरकार इन मसलों को जल्द नहीं सुलझातीं तो आने विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.

कुल मिलाकर एससी एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित आंदोलन ने सियासत के समीकरण बिगाड़ दिए हैं. एक तरफ जहां बीजेपी को दलितों के बीच वोट बैंक खिसकने का डर सता रहा है तो वहीं कांग्रेस आंदोलन के बहाने दलितों के बीच अपनी सियासी ज़मीन तलाश रही है.

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