भय्यू महाराज का सफरनामा, उदयसिंह देशमुख से भय्यू जी तक की कहानी!

भय्यू महाराज का सफरनामा, उदयसिंह देशमुख से भय्यू जी तक की कहानी!
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भय्यू महाराज का सफरनामा, उदयसिंह देशमुख से भय्यू जी तक की कहानी!

 

ऐसे राष्ट्र संत जिनकी नजदीकियाँ पीएम नरेंद्र मोदी से हों, ऐसे महाराज जिन्होंने कभी पूरे महाराष्ट्र में अपनी राजनीतिक शक्ति दिखाई और ऐसे हाई प्रोफाइल भय्यू जी जिन्होंने अन्ना हजारे को भी अनशन तुड़वाकर मनाया हो भला वो कैसे आत्महत्या कर सकते हैं ये सवाल आज हर किसी के मन में है, आइये देखते भय्यू महाराज के सफरनामे की पूरी कहानी एमपी न्यूज़ पर एक्सक्लूसिव –

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शुजालपुर का एक नौजवान लड़का जिसे लोग उदयसिंह देशमुख के नाम से जानते पहचानते थे, मॉडल बनने के लिए मुम्बई पहुंचता है और कुछ समय बाद रातोंरात अध्यमात्मिक गुरु बन जाता है । महाराष्ट्र में उदयसिंह देशमुख को जब लोग भय्यू दादा और भय्यू महाराज का नाम।देते हैं तो ये नाम महाराष्ट्र की राजनीति को भी हिलाने का सबब बन जाता है । देखते ही देखते उदयसिंह भय्यू महाराज पुकारे जाने लगते हैं और पुणे, सांगली सहित कई बड़े क्षेत्रों में भय्यू महाराज के चर्चे चल पड़ते हैं और तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के नजदीकी के रूप में भी महाराष्ट्र की जनता भय्यू महाराज को जानने लगती है । एक वक्त ऐसा भी आता है जब भय्यू महाराज के एक इशारे पर महाराष्ट्र के एमएलए चलने लगते हैं और तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख भय्यू महाराज को महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे विश्वसनीय नाम बना देते हैं । वक्त बदलता है दौर बदलता है और भय्यू महाराज देखते ही देखते राष्ट्र संत कहे जाने लगते हैं।

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इसके बाद जीवन मे भय्यू महाराज ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और धीरे-धीरे अपनी जड़ें पूरे देश मे फैला दी । क्या गुजरात और क्या दिल्ली कई राज्यों की सल्तनत भय्यू महाराज के इशारे पर चलने लगीं । कभी भय्यू जी को नरेंद्र मोदी के साथ देखा जाता तो।कभी शरद पवार के साथ, कभी वो अन्ना हजारे के करीबी कहलाये तो कभी प्रतिभा पाटिल के, राजनेताओं को अध्यमात्मिक सलाह देना भय्यू महाराज का सबसे बड़ा गुण माना जाता था । यही वजह थी कि मूलतः इंदौर आकर बसने वाले सन्त के सूर्योदय आश्रम में बड़े-बड़े नेता मंत्री और मुख्यमंत्री उनसे आशीर्वाद लेने और सौजन्य भेंट के लिए इंदौर आते थे। समय बदला ज़माना बदला और धीरे-धीरे भय्यू महाराज खुद को समेटते भी दिखे, अपने जीवन के सफरनामे।में उन्होंने थोड़े समय पहले खुद को इंदौर तक सीमित भी कर लिया था । खासकर अपनी पत्नी की मौत के बाद तो जैसे उन्होंने अपने आप को बदलना शुरू किया था । फिर अचानक एक दिन उन्होंने अपनी देखरेख करने वाली डॉ आयुषी से उन्होंने दूसरा विवाह करने का फैसला लेकर सभी चौंका दिया । ये दूसरा विवाह भी हुआ और शहनाई बजी भय्यू महाराज के जीवन मे दूसरी बार लेकिन, एक साल बीतते ही महाराज ने एक दिन अचानक सिर में गोली मारकर मौत को गले लगा लिया । ये तारीख थी 12 जून 2018 की जिस दिन हाई प्रोफाइल संत की कहानी का हुआ अंत और देश दुनिया में फैल गयी सनसनी कि आखिर क्यों महाराज पर मानसिक दबाव बढ़ गया और कहानी का द एन्ड हो गया ।

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