राज्यसभा जाने वाले प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी की ऐसा है सियासी कहानी!

राज्यसभा जाने वाले प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी की ऐसा है सियासी कहानी!
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भोपाल – 19 तारीख को राज्यसभा चुनाव की तस्वीर साफ हो जाएगी। नंबर के लिहाज से भाजपा दो सीट जीत रही है। एक ज्योतिरादित्य सिंधिया तो दूसरे प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी। सिंधिया के सियासी सफर से तो सब वाकिफ है लेकिन प्रोफेसर सुमेर सिंह सोलंकी एक ऐसा चेहरा है जो एमपी की सियासत में ज्यादा चर्चाओं में नहीं रहा।

सुमेर सिंह सोलंकी वनवासी कल्याण परिषद से जुड़े हैं। वो बड़वानी में पदस्थ हैं लेकिन आदिवासियों के बीच जागरुकता लाने के लिए जाने जाते हैं. सुमेर सिंह सोलंकी पहली बार किसी चुनाव के लिए मैदान में उतरे हैं. 45 साल के लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा से जुड़े हुए हैं। उनका परिवार जनसंघ के समय से ही पार्टी से जुड़ा हुआ है. खरगोन-बड़वानी से लोकसभा के पूर्व सांसद मकनसिंह सुमेर सिंह सोलंकी के काकाजी हैं।

काकाजी के सांसद होने के कारण सुमेर सिंह सोलंकी अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करते रहे हैं. वो भले ही पहली बार किसी पद के लिए दावेदार बनाए गए हों, लेकिन बीते 20 साल से काका से राजनीति की बारीकियां जरूर सीखते रहे हैं। सुमेर सिंह सोलंकी अनुसूचित जाति जनजाति से आते हैं.खरगोन बड़वानी क्षेत्र में 65फीसदी जाति बरेला की है.ऐसे में खरगोन-ब़ड़वानी के आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में बरेला समाज के लोगों की समस्याओं के समाधान के लिए और कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरूक करने का काम उन्होंने किया है।

शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर एक व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए स्थानीय बोलियों में सुमेर सिंह सोलंकी ने अनुवाद किया। साल 2005 से 2011तक सोलंकी अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद में एक्टिव रहे. समाजसेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राज्य सरकार उन्हें कई पुरस्कार से सम्मानित कर चुकी है। एक आदिवासी नेता को राज्यसभा भेजकर बीजेपी एमपी में आदिवासी वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है।

 

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