मंत्रिमंडल पर सस्पेंस बरकरार, क्या बीजेपी में शुरू हुई सिंधिया की तकरार !

मंत्रिमंडल पर सस्पेंस बरकरार, क्या बीजेपी में शुरू हुई सिंधिया की तकरार !
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भोपाल .  मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के तीन महीने बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार न हो पाना सियासी हलकों में कई सवाल पैदा कर रहा है। राजनीतिक जानकार इस लेटलतीफी को भगवा खेमे में चल रहे अंदर ही अंदर उठापटक को जिम्मेदार मान रहे हैं। दरअसल कमलनाथ सरकार गिराने वाले सिंधिया समर्थक विधायकों को मिल रही पार्टी में विशेष तरजीह से बीजेपी के कई दिग्गज असंतुष्ट हैं। कुछ ने तो अपनी नाराजगी खुले तौर पर जाहिर भी कर दी।

ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिल्ली दौरे के बाद भी मंत्रिमंडल का विस्तार न होना अब पार्टी में चल रही अंदरूनी खींचतान की लगभग पुष्टि कर दी है। बीते दिनों सीएम शिवराज ने कैबिनेट विस्तार  को लेकर दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी , गृहमंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित कई नेताओं से मुलाकात की।  मगर  अभी मंत्रिमंडल में कौन – कौन होगा, इसकी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है। ऐसे में एकबार फिर कुछ समय के लिए कैबिनेट विस्तार टल गया है। सूत्रों की माने तो सीएम शिवराज अपने कैबिनेट में अपने उन पूराने वफादारों को शामिल करना चाहते हैं, जिसके साथ पूर्व में वो 15 साल सरकार चला चुके हैं।

लेकिन भाजपा आलाकमान शिवराज की इस चाहत से सहमत नहीं है, वो सरकार में नए चेहरों को मौका देना चाहती है। इसके अलावा बताया जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपने समर्थकों को कैबिनेट में जगह दिलाने को लेकर अड़े हैं। ऐसे में शिवराज कैबिनेट का विस्तार टल गया है। सूत्रों के के मुताबिक, अब बीजेपी सरकार मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है, ताकि पुराने विधायकों के साथ-साथ नए चेहरों को भी जगह दी जा सके। वहीं बीजेपी के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया अपने समर्थकों को मंत्री बनाने पर अड़े हुए हैं। कहा जा रहा है कि उनकी बीजेपी नेतृत्व से जितने मंत्री पदों को लेकर बात हुई थी, उसमे से एक कम पर भी वो राजी नहीं हैं। ऐसे में करीब 11 सिंधिया समर्थक विधायकों का मंत्री बनना तय माना जा रहा है।

वहीं कांग्रेस से भाजपा में आए एंदल सिंह कंसाना, हरदीप डंग, बिसाहूलाल सिंह और रणवीर जाटव को भी भाजपा और सिंधिया मंत्री बनाने का भरोसा दे चुके हैं।  ऐसे में अगर इन सबको मंत्री बना दिया जाए, तब फिर भाजपा नेताओँ के लिए काफी कम स्पेस बचता है। इतनी ही नहीं मंत्री पद के अलावा विभागों को लेकर भी गतिरोध है। सिंधिया बड़े और मलाईदार विभाग को लेकर अड़े हुए हैं। इन सबके बीच दूर खड़ी कांग्रेस बीजेपी में मचे घमासान पर मंद – मंद मुस्कुरा रही है और हमले भी कर रही है। पार्टी की नजर मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज बीजेपी नेताओं पर है।

पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सज्जन सिंह वर्मा ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि जिस दिन मंत्रिमंडल विस्तार होगा, उसी दिन सबसे बड़ा धमाका होगा, जिसे शिवराज बखुबी समझते हैं। वहीं पूर्व मंत्री जीतू पटवारी ने सीएम शिवराज को एक कमजोर और पंगु मंख्यमंत्री करार देते हुए कहा कि ऐसा नेता कभी मजबूत मध्य प्रदेश नहीं बना सकता। हालांकि इन सब दवाबों के बीच सीएम शिवराज बीच का रास्ता निकालने में जुटे हुए हैं। आने वाले समय में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद होने वाली फूट और अंर्तकलह शिवराज सिंह चौहान के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। ऐसे में प्रदेश में कुछ समय पहले ही जिस शिवराज औऱ महाराज की जोड़ी ने आकार लिया था, वो प्रदेश की सियासी पिच पर कितनी देर तक बैटिंग कर पाती है, य़े भविष्य के गर्भ में है।

 

 

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