आदिवासियों के संस्कृति पर्व भगोरिया का समापन!

आदिवासियों के संस्कृति पर्व भगोरिया का समापन!
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मध्यप्रदेश – मालवांचल में सात दिवसीय भगोरिया मेलों का समापन रविवार को हो गया .. सैकड़ों मांदलों के साथ थालियां बजाते अलग-अलग गांवों के फलियों की टोलियां आईं और कुर्राटियां मारते हुए थिरकती नजर आई..

आदिवासियों के संस्कृति पर्व भगोरिया के मौके पर झाबुआ -अलीराजपुर शहर के बड़े इलाके में पैर रखने की जगह नहीं बची..भगोरिये में शामिल होने के लिए बडी संख्या में ग्रामीण युवक-युवतियां यहां अलीराजपुर पहुचे.

आदिवासी संस्कृति के लिहाज से भगोरिया का समापन उम्मीद से बेहतर रहा भगोरिया में आचार संहिता का जरूर असर रहा …किसी भी राजनीतिक दल पार्टी की गैर नहीं निकली ड्रेस कोड में आभूषण से लदी युवतियां तो बांसुरी पर तान छेड़ते युवा आकर्षण का केंद्र रहे …

इस बार युवाओं के कई समूह भी ड्रेस कोड में आए थे युवतियों की रंग बिरंगी पोशाकों से उठने वाली नाजनीन इत्र की खुशबू ने बाजार और आयोजन स्थलों को तीखी गंध से महका दिया ….

सुर सुरा और श्रृंगार के संगम ने भगोरिया में रंगत बिखेरने के साथ वनवासी अंचल में पारंपरिक आगाज किया..जिधर देखो उधर सिर्फ भीड थी तथा भीड़ में कुर्राटी की गूंज भगोरिया की मस्ती को बता रही थी युवक और युवतियों के साथ हर ग्रामीण इस पर्व की उत्साह और उल्लास में मस्त था…

जिले के वनवासियों की पहचान उनका अपना लिबास अब लगभग पूरी तरह बदल गया है किन्तु ढोल-मांदल के बजते ही कदमों की थिरकन व अल्हड़ता भरी मस्ती अपनी पारम्परिक संस्कृति की याद दिलाती रही….युवा- बुजुर्गों ने एक -दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दी

इस दौरान भारी संख्या में युवक युवतियों ने पारंपरिक पान,ताड़ी,भजियो का सेवक करते हुए नजर आये तो ..तो कही शरीर पर पारम्परिक टेटू बनाते नजर आये .. ऊंचे ऊंचे झूलो का आंनद देखते ही बन रहा था ..

कुल मिलाकर आदिवासियों के संस्कृति पर्व भगोरिया हर्षोउल्लास के साथ संपन्न हुआ ..आदिवासी संस्कृति के लिहाज से भगोरिया का समापन उम्मीद से बेहतर रहा..

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