मजदूरो की बुलंद आवाज़ का थम गया शोर !

मजदूरो की बुलंद आवाज़ का थम गया शोर !
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ऐसी करनी कर चले, हम हंसे जग रोये…पंचतत्व में विलीन हुए बाबू लाल गौर. जी हां प्रदेश की राजनीती के एक युग का अंत हुआ. गुलामी की जंजीरो में जकड़े भारत में जन्म लेने वाला अजय योद्धा आज़ाद भारत की अनंत फिज़ाओं में हमेशा के लिए विलीन हो गया. बाबूलाल गौर को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई. विश्राम घाट पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया. जबकि उनके पार्थिव शरीर को उनके पोते आकाश ने मुखाग्नि दी. गाय, गीता और गोपाल से सीधा सम्बन्ध रखने वाले गौर गोबर से बनी लकड़ियों पर लेट कर अनंत की यात्रा पर निकल गए.

बाबू लाल गौर प्रदेश की सियासत का वो चमकता सितारा थे जिसे कई मायनों में कभी न भर पाने वाली क्षति है. वे हमेशा काबिल-ए-गौर रहे, चाहे दशकों तक उनके मुकाबले कोई भी क्यों न रहा हो? चार दशकों तक प्रखर विधायक के रूप में और कुछ वर्षों तक प्रदेश के दमदार मंत्री के तौर पर बाबूलाल गौर के काम याद रखे जाएंगे. वे जीवट और जुझारू नेता थे जो जाते-जाते पार्टी को ही नहीं बल्कि विरोधियों को भी रुला गए.

कई बार अपनी ही सरकार को आइना दिखाया. मूल्यों से समझौता नहीं, गोविंदपुरा सीट के सरताज. जनहित में विपक्ष के भी साथ रहे बाबूलाल गौर.

कुल मिलाकर स्वर्गीय बाबूलाल गौर एक ज़िंदादिल राजनेता, बेबाक़ व्यक्तित्त्व के धनि थे. उन्होंने हमेशा निर्भिकता, बेबाकी से अपने विचार व्यक्त किए और खुले मन से अपना जीवन जिया और प्रदेश की सियासत के अजय योद्धा ने हर किसी का दिल जीता. आखिरकार मध्यप्रदेश की राजनीती का एक युग समाप्त हुआ. मजदूरो की बुलंद आवाज़ का थम गया शोर…पंच तत्व में विलीन हुए बाबूलाल गौर.

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