देवास मकान हादसे की पूरी कहानी, मलबे में दबे लोगों की ऐसे बची जान!

देवास मकान हादसे की पूरी कहानी, मलबे में दबे लोगों की ऐसे बची जान!
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देवास .  देवास में मंगलवार शाम ढहे तीन मंजिला मकान के मलबे में दबने से दो लोगों की मौत हो गई। जबकि 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रात डेढ़ बजे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला। इस घटना ने एक बार फिर शासन प्रशासन की लापरवाही उजागर कर दी है। मंगलवार शाम को हुए इस घटना में मलबे के नीचे करीब 11 लोग दब गए। घटना की जानकारी सामने आते ही शासन प्रशासन के हाथ पैर फूल गए।

नगर निगम और पुलिस की टीम ने स्थानीय लोगों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन चालू किया। एनडीआरएफ की टीम को भी राहत कार्य में लगाया गया। मकान के मलबे में दबने से दो लोगों की मौत हो गई। जबकि 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रात डेढ़ बजे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद 9 लोगों को देवास जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

शाम के समय घर में सभी लोग अपने अपने काम में लगे थे। कोई किचन में चाय बना रहा था तो कोई  परिवार के साथ बैठकर बात कर रहा था। तो कोई पापा के घर लौटने का इंतजार। तभी अचानक भूकंप जैसा  झटका लगा और फिर सबकुछ मलवे में तब्दील हो गया। आनन फानन में विधायक गायत्री राजे पवार मौके पर पहुंची और अफसरों से पल पल निर्देश देकर राहत कार्य पूरा कराया।

रात में रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ की 30 सदस्यीय टीम ने मोर्चा संभाला। कैमरे डालकर तीनों कहां दबे थे, जानकारी ली और बचाव कार्य शुरू किया। इसके पहले नगर निगम कमिश्नर विशालसिंह चैहान और ट्रैफिक डीएसपी किरण शर्मा ने रेस्क्यू की कमान संभाल रखी थी। अंदर फंसे तीनों लोगों की सलामती के लिए कमिश्नर ने एहतियात पूरी बरती। मशीनों से केवल सहारा देने का काम किया। कांक्रीट का एक-एक हिस्सा कटर और क्रेन की सहायता से सावधानी से काटा। डीएसपी शर्मा जगह मिलने पर मलबे के नीचे उतर गए। पुलिस की कमान उन्होंने संभाली।

जो 3 मंजिला पक्का मकान ढहा, वह 5 साल पहले ही बना था। इतनी जल्दी पक्का मकान ढहना हैरान करता है। इस मकान के ढहने की वजह नगर निगम की अवैध निर्माण होने पर नोटिस देकर कागजी खानापूर्ति कर एक्शन नहीं लेना है। 2015 में इस मकान के निर्माण के वक्त भी आसपास के लोगों ने जनसुनवाई और सीएम हेल्पलाइन तक शिकायत की थी। नैसर्गिक नाले को आगे खिसका कर सरकारी जमीन पर कब्जा करने के आरोप लगे थे, लेकिन नगर निगम ने केवल नोटिस दिया, कोई कार्रवाई नहीं की। यह हादसा उसी का नतीजा है।

 

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