जनजाति विकास मंच की मांग, आदिवासियों को मिले जमीन के बदले ज़मीन या उचित मुआवजा!

जनजाति विकास मंच की मांग, आदिवासियों को मिले जमीन के बदले ज़मीन या उचित मुआवजा!
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इंदौर –  आदिवासियों के हक-अधिकार और मुआबजे की मांग को लेकर जनजाति विकास मंच द्वारा इंदौर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया। आदिवासियों ने सरकार से मांग की है की उन्हें जमीन के बदले जमीन दी जाए और  उचित मुआबजा दिया जाये, अन्यथा उन्हें उग्र आंदोलन के रस्ते पर आगे बढ़ना पढ़ेगा। दरअसल आदिवासी अंचल झाबुआ से दिल्ली – मुंबई 8 लेन गुजरेगा लिहाजा सरकार ने 21 गांवों की करीब 1517 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की है, जब आदिवासियों को जमीनों से हटाया गया तब कहा गया था मुआबजा मिलेगा।

लेकिन अभी भी 200 से जायदा परिवार ऐसे हैं जिन्हें न तो जमीन मिली है न ही कोई मुआवजा। विकास के नाम रोड कांट्रेक्टर ने आदिवासियों की खड़ी फसले तहसनहस कर दी। अब प्रशानिक अधिकारी 7 दिन में घर खाली करने की धमकी दे रहे हैं। ऐसे में डरे-सहमे आदिवासियों ने  जनजाति विकास मंच मालवा के बैनर तले इंदौर में प्रेस वार्ता आयोजित कर मिडिया से अपनी पीड़ा जाहिर की। इस मौके पर  जनजाति विकास मंच के पदादिकारी पुंजलाल निनामा, राधेश्याम की जामले, शंकरलाल जी कटारा, लीला बेन, गोपाल  सिंगार उपस्थित रहे।

वहीं जनजाति विकास मंच के मालवा प्रमुख  कैलाश अमलियार ने कहा की हमारे पूरखे पीडियो से खेती कर रहे थे। तड़वी को लगान भी दे रहे थे लेकिन प्रशासन की लापरवाही के चलते उन जमीनों के कागजात नहीं बनाये गए। अब हमें जमीन से बेदखल किया जा रहा है। सरकार हमारे दर्द को समझ रही है लेकिन प्रशानिक अधिकारियो की लापरवाही के चलते हम भरी बारिश में संघर्ष कर रहे हैं।

 

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