विश्व आदिवासी दिवस पर जननायक टंट्या मामा को दी गई श्रध्दांजलि!

विश्व आदिवासी दिवस पर जननायक टंट्या मामा को दी गई श्रध्दांजलि!
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झाबुआ . 21 वीं सदी का दौर है, हर ओर विकास की बात की जा रही है। मानव सभ्यताओं को जीवित रखने के लिए प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे में सभ्यता और संस्कृति के संरक्षण की सूई हमारे आदिवासी समाज की ओर घूम ही जाती है। आज भी आदिवासी प्राचीन संस्कृति को बड़े ही गर्व के साथ जी रहे हैं। तीज, त्योहारों पर आंनद और उत्साह का बेजोड़ संगम देखने को मिलता है।

यूं तो विश्व आदिवासी दिवस पर गजब का उत्साह देखने को मिलता है लेकिन इस बार कोरोना संकट के बीच 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस बड़ी सादगी में मनाया गया। इस मौके पर जिला केंन्द्रों पर आदिवासी समाज से जुड़े जननायक को याद किया गया। झाबुआ में आदिवासी संगठन के चुनिंदा प्रतिनिधियों ने स्थानीय टंट्या मामा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। इस दौरान स्थानीय जनप्रतिनिधि भी टंट्या मामा को याद करने उनके प्रतिमा स्थल पर पहुंचे।  वहीं धार जिले के पीथमपुर में भीम सेना के नेतृत्व में रैली निकाली गई।

आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग को लेकर चिंतित है। प्रकृति के बदलाव के वजह से जो परिस्थिति उत्पन्न हुई है यह काफी चिंतनीय है। प्राकृतिक संतुलन को बनाये रखने में आदिवासी समुदाय की भूमिका सबसे अहम रही है और आगे भी रहेगी। इसिलिए आदिवासियों को देश का मूल निवासी भी कहा जाता है।

 

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