एमपी का अजब गजब मामला, टैक्स भरने के लिए बेचना पड़ रही किडनी

एमपी का अजब गजब मामला, टैक्स भरने के लिए बेचना पड़ रही किडनी
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इंदौर : मज़बूरी में शरीर के अंग बेचने के बारे में आपने टीवी और फिल्मों में ही देखा सुना होगा, लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर में ऐसा अजब गजब मामला सामने आया है. गुरु तेग बहादुर ट्रस्ट के ऑफिस के बाहर किडनी बेचने का बैनर लगा हुआ है. जिसपर किडनी बेचने की अंतिम तारीख 31 मार्च 2018 लिखी हुई है. यह बैनर वहां से निकलने वाले लोगों को न सिर्फ चौंका रहा है बल्कि सुर्ख़ियों में भी बना हुआ है.

दरअसल नगर निगम का संपत्तिकर चुकाने के लिए गुरु तेग बहादुर ट्रस्ट इंदौर के कर्मचारियों को अपनी किडनी बेचने के लिए मजबूर होना पड़ गया है. माता गुजरी कॉलेज कैंपस में ही ट्रस्ट के ऑफिस के बाहर उन्होंने किडनी बचने का बैनर लगा है जिसमें किडनी बेचने की बात कही है.

ट्रस्टियों में से एक सूत्र ने बताया कि ट्रस्ट को 41 साल हो चुके हैं. ट्रस्ट ने माता गुजरी गर्ल्स स्कूल, महाराणा रणजीत सिंह कॉलेज, खंडवा रोड पर एक स्कूल बनवाया. इन सभी में कभी हमने सरकार से कोई मदद नहीं ली.

शहर के आसपास के गांवों को नगर निगम में शामिल किया गया तो इस पर नगर निगम ने संपत्तिकर के 1 करोड़ बकाया बता दिए. जबकि यह चेरिटेबल संपत्ति है. ऐसी स्थिति में कर वसूला जा रहा है. निगम के अधिकारियों से जब बात रखी तो उन्होंने कहा कि 40 से 50 लाख स्र्पए कर बनता है, वह जमा कर दीजिए, जबकि हम अभी तक 37 लाख स्र्पए बतौर संपत्ति कर के जमा कर चुके हैं. ऐसी स्थिति में हम किडनी ही बेच सकते हैं.

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