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MP: निगम–मंडल नियुक्तियों का रास्ता साफ, BJP के ‘एक पद’ फॉर्मूले पर सहमति

मध्यप्रदेश में निगम मंडल में नियुक्तियों को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। दिल्ली से लेकर ग्वालियर चम्बल तक हलचल तेज है, BJP ने नियुक्ति का फार्मूला तैयार कर लिया है,  सत्ता-संगठन के क्षेत्रीय और जातीय फॉर्मूले में 3 पूर्व मंत्री-विधायक भी शामिल है , वही हारे हुए नेताओं को निगम-मंडल में सेट करने की भी तैयारी है। 

मध्यप्रदेश में निगम, मंडल और प्राधिकरणों में राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता लगभग साफ हो गया है। बीजेपी के ‘एक पद’ फॉर्मूले पर केंद्रीय नेतृत्व की सैद्धांतिक सहमति के बाद अब सत्ता के गलियारों में हलचल बढ़ गई है। सूत्रों के मुताबिक बिहार विधानसभा चुनाव के बाद चरणबद्ध तरीके से इन नियुक्तियों की प्रक्रिया शुरू होगी। फरवरी 2024 में प्रदेश की सभी 46 निगम-मंडलों में की गई राजनीतिक नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। उसके बाद से प्रदेश में नियुक्तियों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई थी। अब केंद्रीय नेतृत्व से ‘एक पद’ फॉर्मूले को मंजूरी मिलने के बाद नियुक्तियों का रास्ता साफ माना जा रहा है।।

सूत्रों के अनुसार, इस बार की सूची में कई पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों और संगठन से जुड़े वरिष्ठ पदाधिकारियों के नाम शामिल हैं। सरकार हाल ही में जन अभियान परिषद, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग और निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग में नियुक्तियाँ कर चुकी है, जिसके बाद निगम-मंडलों की तैयारी भी अंतिम चरण में बताई जा रही है।

सूत्र बताते हैं कि नई नियुक्तियाँ क्षेत्रीय और जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए की जाएंगी। साथ ही सत्ता और संगठन के बीच तालमेल बनाए रखने का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा। यह नियुक्तियाँ एक साथ नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से होंगी। माना जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव के बाद पहले चरण की कुछ प्रमुख नियुक्तियाँ घोषित की जा सकती हैं। नियुक्तियों पर अंतिम निर्णय के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय नेतृत्व के बीच दो दौर की चर्चा हो चुकी है।

वहीं 10 नवंबर को आरएसएस की बैठक में शामिल होने आए BJP के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बी.एल. संतोष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और संगठन महामंत्री हितानंद शर्मा से करीब दो घंटे तक विस्तृत बातचीत की। इस बैठक को भी निगम–मंडल नियुक्तियों से जोड़कर देखा जा रहा है। कुल मिलाकर निगम-मंडल नियुक्तियों को लेकर प्रदेश की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और अब सबकी निगाहें बिहार चुनाव के बाद होने वाली घोषणाओं पर टिक गई हैं। देखना होगा कि पहली सूची में किन नेताओं को जगह मिलती है और प्रदेश की राजनीतिक दिशा पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है।

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