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MP: BJP के पोस्टर ब्वाय बने CM डॉ. मोहन यादव, राजनीति में तेजी से बढ़ता कद

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दो साल के कार्यकाल के साथ भारतीय राजनीति में तेज़ी से उभरते हुए नेतृत्व के रूप में सामने आए हैं। प्रशासन, संगठन और चुनावी रणनीति—तीनों मोर्चों पर उन्होंने ऐसी क्षमता का परिचय दिया है कि, बीजेपी उन्हें अपने प्रमुख चेहरों में शामिल कर चुकी है। बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका इसका नया उदाहरण बनी है।

भाजपा और संघ की प्रयोग भूमि माने जाने वाले मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने दो साल के कार्यकाल में ऐसा प्रशासनिक और राजनीतिक कौशल दिखाया है कि आज वे भाजपा के पोस्टर बॉय बनकर उभरे हैं।

चुनाव रणनीति हो, सुशासन का मॉडल हो या विकास—भाजपा अब देशभर में मध्यप्रदेश मॉडल का उदाहरण पेश कर रही है। दिसंबर  2023 में जब पार्टी ने उन्हें मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी, तब कई चुनौतियाँ थीं। लेकिन लगभग दो साल में डॉ. यादव ने सरकार के फैसलों को तेज़ी, पारदर्शिता और कड़े प्रशासनिक रवैये के साथ लागू कर यह साबित किया कि भाजपा का चयन दूरदर्शी था। शहर से लेकर ग्रामीण व्यवस्था तक, उनकी सरकार ने उन कामों पर फोकस किया जिन पर पिछले कई वर्षों तक पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया था। सुशासन, उत्तरदायित्व और तेज़ प्रशासन डॉ. यादव की पहचान बन गए।

एक्सटेंशन

वीओ- चुनावी रणभूमि में भी उनका कद लगातार बढ़ा है। बिहार विधानसभा चुनाव में भाजपा-एनडीए की रणनीति के महत्वपूर्ण चेहरे के रूप में डॉ. यादव ने 25 सीटों पर प्रचार किया। इनमें से 18 सीटें एनडीए ने जीतीं—और यह परिणाम उनके प्रभाव का संकेत माना जा रहा है। यादव समाज के वोट बैंक में सेंध लगाने के भाजपा के प्रयास में वे एक मजबूत चेहरा साबित हुए। मध्यप्रदेश में भी डॉ. यादव के नेतृत्व ने भाजपा को नई मजबूती दी। 2024 के लोकसभा चुनाव में राज्य की सभी 29 सीटें जीतकर भाजपा ने इतिहास रच दिया। यहाँ तक कि कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ छिंदवाड़ा को भी 26 साल बाद भाजपा ने अपने नाम किया।

प्रशासनिक फैसलों में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी दिखाते हुए सरकार ने दो बड़े निर्णयों को वापस लेकर जनता का भरोसा भी जीता। सिंहस्थ लैंड पूलिंग एक्ट को वापस लेने पर उज्जैन के किसानों ने जश्न मनाया, वहीं ममलेश्वर लोक प्रोजेक्ट को रद्द करने के बाद ओंकारेश्वर में भी लोगों ने स्वागत किया। चुनावी राजनीति, संगठन क्षमता और मजबूत प्रशासन इन तीनों का संतुलन बनाए रखते हुए डॉ. मोहन यादव भारतीय राजनीति के उन नेताओं में गिने जा रहे हैं जिनकी लोकप्रियता कम समय में तेज़ी से बढ़ी है।

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