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MP: धर्मांतरण के खिलाफ कड़े कानून की मांग, राज्यसभा में सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने उठाया मुद्दा

देश में धर्मांतरण को लेकर सियासी और सामाजिक बहस के बीच राज्यसभा सांसद डॉ सुमेर सिंह सोलंकी ने सदन में एक बड़ा मुद्दा उठाया गया है। राज्यसभा सांसद ने जनजातीय समाज की पहचान और संस्कृति को बचाने के लिए जबरन धर्मांतरण के खिलाफ कड़े केंद्रीय कानून कि मांग की है। सोलंकी ने साफ कहा कि प्रलोभन, दबाव या छल के जरिए किया गया धर्मांतरण न सिर्फ अपराध है… बल्कि देश की सामाजिक संरचना के लिए भी खतरा है।

नई दिल्ली में संसद के उच्च सदन राज्यसभा में सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने जनजातीय समाज से जुड़े एक बेहद संवेदनशील मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार देता है…लेकिन जब यही स्वतंत्रता छल, बल और प्रलोभन के जरिए प्रभावित होती है तो यह गंभीर चिंता का विषय बन जाती है। सोलंकी ने आरोप लगाया कि देश के कई जनजातीय क्षेत्रों में सुनियोजित तरीके से धर्मांतरण कराया जा रहा है, जहां आर्थिक लालच, शिक्षा, नौकरी और इलाज जैसे साधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे  आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान पर संकट है…

सांसद ने यह भी बताया कि कुछ राज्यों में धर्मांतरण विरोधी कानून मौजूद हैं लेकिन पूरे देश में एक समान और सख्त केंद्रीय कानून की जरूरत महसूस की जा रही है। डॉ. सोलंकी ने सुझाव दिया कि जबरन धर्मांतरण के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए…साथ ही उन्होंने यह भी मांग रखी कि धर्मांतरण कर चुके लोगों को जनजातीय आरक्षण के दायरे से बाहर किया जाए।  उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 342 में संशोधन की आवश्यकता पर भी जोर दिया…जिससे जनजातीय समाज के हितों को और अधिक मजबूती मिल सके।

धर्मांतरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर राज्यसभा सांसद डॉ सुमेर सिंह सोलंकी की यह मांग अब सियासी और कानूनी दोनों स्तर पर बहस को तेज कर सकती है। देखना होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है और क्या देशभर में एक समान कानून की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

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