MP: मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश साथ-साथ, मिलकर होगी विकास और आध्यात्मिकता की बात

मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश अब मिलकर सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई कहानी लिखने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। वाराणसी दौरे पर आए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एमपी यूपी सहयोग सम्मेलन में शिरकत की और कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर सुशासन और आध्यात्मिक पर्यटन की नई इबारत लिखेंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विरासत के साथ विकास की सोच को आगे बढ़ाते हुए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की सरकारें अब सुशासन और धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई साझेदारी की ओर बढ़ रही हैं। इसी कड़ी में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने विश्व प्रसिद्ध श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और निरंतर प्रगति की कामना की।
इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव वाराणसी में एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में शामिल हुए और दोनों राज्यों की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी व जीआइ टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य उत्पादों, निवेश अवसरों एवं पर्यटन संभावनाओं को साझा मंच पर प्रस्तुत किया। इस दौरान काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन के महाकाल मंदिर के बीच व्यवस्थाओं को और बेहतर बनाने के लिए एक महत्वपूर्ण एमओयू किया गया, जिससे श्रद्धालुओं को और अधिक सुगम सुविधाएं मिल सकेंगी। सीएम मोहन यादव ने कहा कि, बाबा महाकाल के महालोक के बाद उज्जैन रोजगार और विकास की गाथा लिख रहा है , उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश का सम्बन्ध भगवान राम और भगवान् कृष्ण के समय से है।
सीएम ने कहा कि, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश निवेश को लेकर अपनी अलग कहानी बना रहा है, साझा विरासत को गले लगाकर आगे बढ़ रहे है , वो जमाना गया जब दो राज्य आपस में लड़ते थे। उत्तरप्रदेश के साथ 2000 मेगावाट की सोलर परियोजना शुरू की जा रही है। प्रयागराज कुंभ की व्यवस्थाओं से सीखकर उज्जैन सिंहस्थ 2028 प्रबंध किए जाएंगे ताकि भक्तों की व्यवस्था हो सके।
कुल मिलाकर, वाराणसी दौरे के जरिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने साफ संकेत दिए हैं कि मध्यप्रदेश आध्यात्मिक पर्यटन और सुशासन के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है, और आने वाला सिंहस्थ-2028 इसका बड़ा उदाहरण बन सकता है।



