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MP में एनालॉग पनीर पर लगेगा बैन, CM मोहन यादव का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश में अब पनीर के नाम पर होने वाले खेल पर सरकार सख्ती करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने खाद्य सुरक्षा और जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। सवाल ये है कि आखिर एनालॉग पनीर क्या है, असली पनीर से कितना अलग है और बाजार में इसकी पहचान कैसे करें । सरकार अब होटल, मिठाई की दुकानों, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में जांच अभियान चलाकर ऐसे उत्पादों पर कार्रवाई करने की तैयारी में है। 

मध्य प्रदेश में अब एनालॉग पनीर की बिक्री और उत्पादन पर रोक लगाने की तैयारी है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने अधिकारियों को प्रदेशभर में जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। खाद्य विभाग की टीमें होटल, मिठाई की दुकानों, डेयरी और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स की जांच करेंगी और नियमों के विपरीत पाए जाने वाले उत्पादों पर खाद्य सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। 

दरअसल, बाजार में असली दूध से बने पनीर की जगह सस्ते एनालॉग पनीर के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठते रहे हैं। एनालॉग पनीर को असली पनीर की तरह दिखने और इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया जाता है लेकिन इसकी संरचना पारंपरिक दूध से बने पनीर से अलग होती है। इसमें वनस्पति वसा, मिल्क पाउडर, प्रोटीन और खाद्य एडिटिव्स जैसे घटकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। एनालॉग पनीर को समझना इसलिए जरूरी है क्योंकि यह कई बार असली पनीर जैसा दिखाई देता है। खासकर पिज्जा, बर्गर, फ्रोजन फूड और कुछ फूड सर्विस प्रतिष्ठानों में इसकी कम कीमत के कारण मांग हो सकती है।

सरकार का जोर अब इस बात पर है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद की सही जानकारी मिले और लेबलिंग के नियमों का पालन किया जाए। असली पनीर दूध को फाड़कर तैयार किया जाता है और इसमें दूध से मिलने वाला प्रोटीन और कैल्शियम प्रमुख पोषक तत्व होते हैं। वहीं एनालॉग उत्पादों में दूध के अलावा दूसरे फैट और सामग्री का इस्तेमाल किया जा सकता है। पनीर के बजाय च्ंदममत ।दंसवहनम या प्उपजंजपवद च्ंदममत जैसे शब्द लिखे हों तो उसे असली दूध से बना पारंपरिक पनीर मानकर नहीं चलना चाहिए। एनालॉग पनीर के खिलाफ जांच अभियान और कार्रवाई के निर्देश के बाद आने वाले दिनों में होटल, डेयरी, मिठाई दुकानों और फूड यूनिट्स पर खाद्य विभाग की निगरानी बढ़ सकती है। 

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