MP: सरकारी खर्चों पर मोहन सरकार की चली कैंची, विदेश यात्राओं पर रोक

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी खर्चों में कटौती का बड़ा फैसला लिया है। कमजोर मानसून और घटती राजस्व आय को देखते हुए वित्त विभाग ने मितव्ययिता के नए नियम लागू कर दिए हैं। अब सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा, होटलों में बैठकें और अतिरिक्त सरकारी वाहनों पर रोक रहेगी। इतना ही नहीं, अब अफसरों के लिए व्हीकल पूलिंग भी अनिवार्य होगी।
कम खर्च…बेहतर प्रबंधन…और सरकारी फिजूलखर्ची पर रोक, यही मोहन सरकार का मंत्र है। जी हां मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सरकारी खर्चों पर कैंची चला दी है। इसी सोच के साथ मध्य प्रदेश सरकार ने खर्चों में कटौती के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं। अब विशेष अनुमति के बिना सरकारी खर्च पर विदेश यात्रा नहीं हो सकेगी। होटल और निजी संस्थानों में सरकारी बैठकें, प्रशिक्षण और कार्यशालाएं आयोजित नहीं की जाएंगी। इन्हें सरकारी भवनों या वर्चुअल माध्यम से आयोजित करने को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार ने परिवहन खर्च कम करने के लिए व्हीकल पूलिंग अनिवार्य कर दी है। यानी दो या तीन अधिकारी एक ही सरकारी वाहन का उपयोग करेंगे। जिन अधिकारियों के पास अतिरिक्त विभागों का प्रभार है, उन्हें अलग वाहन नहीं मिलेगा। नई सरकारी गाड़ियों की खरीद पर पहले से लगी रोक भी जारी रहेगी और किराए के पेट्रोल-डीजल वाहनों की जगह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा सरकारी कैलेंडर, डायरी, वीआईपी उपहार, स्वागत समारोह और कार्यालयों की अनावश्यक साज-सज्जा जैसे खर्चों पर भी रोक लगा दी गई है। अधिकारी अब सरकारी खर्च पर सिर्फ इकोनॉमी क्लास में ही हवाई यात्रा कर सकेंगे।
सरकार का अनुमान है कि इस वर्ष प्रदेश की आय बजट अनुमान से करीब 10 हजार करोड़ रुपये कम रह सकती है। इसी को देखते हुए वित्त विभाग ने सभी विभागों, निगमों, मंडलों और विश्वविद्यालयों में मितव्ययिता के निर्देश लागू किए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी पहले ही अपने काफिले में वाहनों की संख्या 13 से घटाकर 8 कर चुके हैं और इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन फैसलों से सरकारी खर्च में कितनी बचत होती है और इसका असर प्रशासनिक व्यवस्था पर कितना पड़ता है।



