MP: ख़त्म होगा बिजली संकट?, सरकार ने दिए संकेत, एक-दो दिन में सुधरेंगे हालात

मध्यप्रदेश में अघोषित बिजली कटौती से ग्रामीण परेशान हैं। कहीं 8 से 10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें हैं, तो कहीं गांवों में पूरी रात अंधेरा छाया रहता है। बिजली नहीं मिलने से सिंचाई प्रभावित हो रही है और किसानों की फसलों पर संकट मंडराने लगा है। वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बिजली संकट की वजह कम बारिश और धान की बोनी में देरी से बढ़ी मांग को बताया है। सरकार का दावा है कि दूसरे राज्यों से बिजली लेकर आपूर्ति सुधारने की कोशिश की जा रही है।
मध्य प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में बिजली कटौती को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। ग्रामीणों की शिकायत है कि कई जगह 8 से 10 घंटे तक बिजली नहीं मिल रही, तो कुछ गांव रातभर अंधेरे में डूबे रहते हैं। बिजली की अनियमित आपूर्ति से घरेलू कामकाज के साथ खेती-किसानी भी प्रभावित हो रही है। सिंचाई के लिए बिजली नहीं मिलने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। बिजली संकट को लेकर भोपाल, सीहोर और बैतूल में चक्काजाम और प्रदर्शन की खबरें सामने आई हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति पर बात की। मुख्यमंत्री के मुताबिक, इस साल अचानक बारिश थमने और कुल मिलाकर कम बारिश होने से बिजली आपूर्ति पर असर पड़ा है। धान की बोनी में देरी के कारण अलग-अलग जिलों में बिजली की मांग बढ़ी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि बिजली संकट दूर करने के प्रयास शुरू कर दिए गए हैं। उनके अनुसार, गुजरात और सरदार सरोवर से 800 मेगावाट बिजली मिल रही है। इसके अलावा पंजाब और उत्तर प्रदेश से भी बिजली लेकर आपूर्ति बेहतर करने की कोशिश की जा रही है। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि अगले एक-दो दिन में इसके अच्छे परिणाम सामने आएंगे।
फिलहाल, ग्रामीण इलाकों में लोगों और किसानों को नियमित बिजली आपूर्ति का इंतजार है। अब देखना होगा कि दूसरे राज्यों से बिजली लेने की व्यवस्था और सरकार के प्रयासों से हालात कितनी जल्दी सुधरते हैं।



