MP: मंत्री लखन पटेल से क्यों छिना पशुपालन विभाग?, CM मोहन यादव का सख्त एक्शन

मध्य प्रदेश की राजनीति में देर रात ऐसा फैसला हुआ जिसने हर किसी को चौंका दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस ले लिया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात मंत्री का विभाग बदल गया? क्या इसके पीछे 125 एकड़ गौशाला जमीन आवंटन में कथित सौदेबाजी की शिकायत है…या फिर दिल्ली से आया एक फोन कॉल? इस कार्रवाई को लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चाएं तेज हैं। आखिर पूरा मामला क्या है…
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग अचानक वापस ले लिया गया। सरकार ने अभी तक इस फैसले की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में कई कारणों की चर्चा जोरों पर है।
सबसे ज्यादा चर्चा 125 एकड़ जमीन पर बनने वाली बड़ी गौशालाओं के लिए लेटर ऑफ इंटेंट जारी करने में कथित सौदेबाजी की शिकायतों की हो रही है। बताया जा रहा है कि इस मामले की शिकायत दिल्ली तक पहुंची, जिसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त रुख अपनाया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकार किसी भी तरह की कथित सौदेबाजी और भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी।
सूत्रों के मुताबिक, पशुपालन विभाग की कार्यशैली को लेकर भी लंबे समय से नाराजगी थी। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की करीब 1500 करोड़ रुपये की डेयरी परियोजना में लगातार देरी, सांची दुग्ध संघ से जुड़े फैसलों में सुस्ती और विभाग की धीमी कार्यप्रणाली पर मुख्यमंत्री पहले भी असंतोष जता चुके थे। चर्चा यह भी है कि गौशाला योजना में पात्र संस्थाओं की जगह कथित तौर पर अपात्र संस्थाओं को लाभ मिलने की शिकायतें सामने आई थीं। इन शिकायतों को लेकर पहले विभाग के एक अधिकारी पर भी कार्रवाई की जा चुकी थी।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी है कि मंगलवार देर रात दिल्ली से आए एक फोन कॉल के बाद पूरा घटनाक्रम तेजी से बदला और रातों-रात अधिसूचना जारी कर मंत्री लखन पटेल से पशुपालन विभाग वापस ले लिया गया। हालांकि, इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और सरकार ने अब तक विभाग परिवर्तन के पीछे कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया है। लेकिन इस फैसले ने मध्य प्रदेश की राजनीति में कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।



