MP: इंदौर में पानी पर सियासी संग्राम!, जलसंकट के बीच BJP में घमासान

इंदौर में पानी का संकट क्या गहराया, बीजेपी के भीतर सियासी पारा भी चढ़ गया! शहर की प्यास बुझाने के लिए बैठक बुलाई गई, लेकिन बैठक में ही नेताओं की नाराजगी का टैंकर छलक पड़ा! मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की बैठक से पांच विधायक नदारद रहे… और इंदौर की विधायक मालिनी गौड़ ने तो सीधे सवाल दाग दिया—जब काम ही नहीं होते, तो बैठक में जाने से क्या मतलब!
भाभी ने भाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, या कहें कि विधानसभा नंबर चार की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है! पानी की समस्या के बीच बीजेपी के भीतर ये कौन-सी सियासी धार बह रही है? देखिए, इंदौर में जलसंकट के साथ सियासत का भी हाई-वोल्टेज ड्रामा!
इंदौर में लोग पानी की समस्या से परेशान हैं… और इसी बीच बीजेपी के भीतर भी पानी को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। शहर के जलसंकट पर चर्चा और समाधान के लिए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बैठक बुलाई, लेकिन इस बैठक में 9 में से 5 विधायकों का नहीं पहुंचना अपने आप में चर्चा का विषय बन गया। अब सवाल ये कि जब शहर पानी के लिए परेशान है, तो क्या जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल की भी कमी है? और क्या जलसंकट का मुद्दा अब बीजेपी के अंदरूनी सियासी समीकरणों को भी उजागर करने लगा है?
इस पूरे सियासी घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा विधानसभा नंबर चार की विधायक मालिनी गौड़ के बयान की हो रही है। मालिनी गौड़ ने साफ कहा कि जब काम ही नहीं होते, तो बैठक में जाने से क्या मतलब! उनका आरोप है कि अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे और उनकी विधानसभा को नजरअंदाज किया जा रहा है।
यानी शिकायत सिर्फ पानी की समस्या को लेकर नहीं, बल्कि कामकाज और अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर भी है। मालिनी गौड़ का कहना है कि महज बैठकें करने से कुछ नहीं होता, धरातल पर काम होना चाहिए। इसी वजह से वह बैठक में शामिल नहीं हुईं।
अब इस बयान को इंदौर की राजनीति में भाई-भाभी के सियासी समीकरण से जोड़कर देखा जा रहा है। एक तरफ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, दूसरी तरफ विधायक मालिनी गौड़ की खुली नाराजगी। सियासी गलियारों में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये सिर्फ जलसंकट पर नाराजगी है, या फिर विधानसभा नंबर एक और चार के बीच पुरानी राजनीतिक खींचतान भी इसमें रंग दिखा रही है?



