MP: मोहन कैबिनेट का बड़ा फैसला, निजी संस्था संचालित करेगी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र

मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर मोहन सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में रीवा, देवास और गुना के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को पायलट प्रोजेक्ट के तहत आउटसोर्स करने को मंजूरी दे दी गई है। इसके साथ ही स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को भी हरी झंडी मिल गई है। आखिर क्या है ये नया मॉडल और इससे आम जनता को क्या फायदा होगा.
मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मोहन कैबिनेट ने बड़ा कदम उठाया है। रीवा, देवास और गुना जिलों के 18 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर संचालित होंगे। कैबिनेट मंत्री चैतन्य कश्यप ने बताया इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत निजी संस्थाएं डॉक्टर और स्टाफ उपलब्ध कराएंगी, जबकि अस्पताल की जमीन और भवन सरकार के पास ही रहेंगे। दवाइयों की आपूर्ति भी सरकार द्वारा ही सुनिश्चित की जाएगी।
सरकार का कहना है कि, इस मॉडल से योग्य और प्रशिक्षित स्टाफ की उपलब्धता बढ़ेगी और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। इसके लिए पूरी प्रक्रिया टेंडर के माध्यम से की जाएगी।
वहीं, कैबिनेट ने स्वास्थ्य अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति-2026 को भी मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करना और अस्पतालों व डायग्नोस्टिक केंद्रों को बढ़ावा देना है। नीति के तहत परोपकारी, सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं द्वारा संचालित अस्पतालों और डायग्नोस्टिक केंद्रों को विशेष आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह सहायता बुनियादी ढांचे के विकास, आधुनिक मशीनों की खरीद और सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए दी जाएगी।
इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पांच कैबिनेट मंत्रियों की एक समिति बनाई गई है, जो आवश्यक मानदंड तय कर सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी।
कुल मिलाकर, मध्यप्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए नए प्रयोग कर रही है। अब देखना होगा कि PPP मॉडल और नई नीति जमीन पर कितनी कारगर साबित होती है और आम जनता को इसका कितना फायदा मिलता है।



