MP: CM मोहन यादव के बचाव में उतरे मंत्री तुलसी सिलावट, जमीन खरीदी के आरोपों पर पेश किया पूरा हिसाब

मध्यप्रदेश की राजनीति में ज़मीन खरीदी को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, लेकिन अब मुख्यमंत्री मोहन यादव के बचाव में सरकार के मंत्री खुलकर सामने आ गए हैं। कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट ने प्रेस के सामने पूरा हिसाब-किताब पेश करते हुए साफ कहा है कि, मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं हुई है.
मुख्यमंत्री मोहन यादव पर विपक्ष की ओर से लगाए गए जमीन खरीदी के आरोपों पर अब मंत्री तुलसी सिलावट ने तथ्यात्मक जवाब दिया है। सिलावट ने साफ कहा कि साल 2023 में मुख्यमंत्री के पास कुल 17.967 एकड़ कृषि भूमि थी, और जून 2026 में भी यह आंकड़ा बिल्कुल उतना ही है। वहीं, मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव की जमीन को लेकर भी स्थिति लगभग यथावत बताई गई है। नवंबर 2023 में जहां उनके पास 12.287 एकड़ भूमि थी… वहीं जून 2026 में यह मामूली बढ़कर 12.292 एकड़ हुई है। सरकार का दावा है कि यह अधिकांश जमीन 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थी, यानी मुख्यमंत्री बनने से काफी पहले।
विपक्ष की ओर से उठाए गए कंपनी कनेक्शन के मुद्दे पर भी मंत्री सिलावट ने सफाई दी। उन्होंने बताया कि सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी 2008 में कृषि कार्यों के लिए बनाई गई थी…मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी 2017 में ही कंपनी के निदेशक पद से अलग हो चुके थे…और मार्च 2026 में अपने सभी शेयर भी छोड़ चुके हैं। मुख्यमंत्री के बेटे वैभव यादव को लेकर भी उठे सवालों पर मंत्री ने साफ किया कि ग्राम सांवरखेड़ी में 2019 से मार्च 2023 के बीच करीब 16.38 एकड़ जमीन खरीदी गई थी.. यानि ये सौदे मुख्यमंत्री बनने से पहले के हैं। वहीं बहू शालिनी यादव द्वारा 2025 में खरीदी गई करीब 10 एकड़ जमीन को लेकर भी कहा गया कि यह पूरी तरह कृषि भूमि है… और किसी मास्टर प्लान क्षेत्र में शामिल नहीं है।
मंत्री तुलसी सिलावट ने यह भी कहा कि, मुख्यमंत्री के रिश्तेदार स्वतंत्र इकाइयाँ हैं…उनके निजी व्यवसाय या लेन-देन को मुख्यमंत्री से जोड़ना पूरी तरह गलत है। तो आंकड़ों के साथ सरकार ने साफ कर दिया है कि जमीन को लेकर लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं…अब देखना होगा कि इन दावों के बाद सियासत किस करवट बैठती है…



