MP: भोपाल मास्टर प्लान-2047 का ड्राफ्ट तैयार, शहर के भविष्य का नया खाका

भोपाल के भविष्य की तस्वीर अब मास्टर प्लान-2047 के ड्राफ्ट में सामने आ गई है। लंबे अंतराल के बाद भोपाल विकास योजना-2047 का प्रारूप तैयार किया गया है, जिसमें प्राकृतिक विरासत के संरक्षण से लेकर आधुनिक सुविधाओं, बेहतर मोबिलिटी और आर्थिक विकास तक कई बड़े प्रस्ताव शामिल हैं।
झीलों और पहाड़ियों के शहर भोपाल के आने वाले वर्षों की विकास यात्रा का खाका तैयार है। भोपाल विकास योजना-2047 का ड्राफ्ट शहर के प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के साथ विकास और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
ड्राफ्ट में भोजताल और उसके जलग्रहण क्षेत्र, पहाड़ियों, वन क्षेत्रों, तालाबों और जलाशयों के संरक्षण के प्रावधान किए गए हैं। साथ ही शहर की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए आवास, रोजगार, परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की योजना भी प्रस्तावित की गई है।
मास्टर प्लान के सबसे अहम प्रस्तावों में करीब 51 किलोमीटर लंबा ग्रोथ कॉरिडोर शामिल है। यह कॉरिडोर एयरपोर्ट, प्रस्तावित सीएमयू, लॉजिस्टिक क्षेत्र और विभिन्न उपनगरों को जोड़ने की परिकल्पना के साथ तैयार किया गया है। इस कॉरिडोर में होटल, हॉस्पिटैलिटी, स्वास्थ्य सेवाएं, आईटी, एआई और डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक, मॉल, मल्टीप्लेक्स, कॉरपोरेट ऑफिस, एजुकेशन हब और हाउसिंग जैसी गतिविधियों को मिश्रित उपयोग के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव है।
वहीं मार्गों की चैड़ाई के आधार पर मिश्रित भूमि उपयोग की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, ताकि आवास और कार्यस्थल के बीच बेहतर सामंजस्य बनाया जा सके और सार्वजनिक परिवहन आधारित मोबिलिटी को बढ़ावा मिले।
भोपाल की हरियाली को लेकर भी ड्राफ्ट में बड़ा लक्ष्य रखा गया है। मास्टर प्लान-2005 में करीब 16 प्रतिशत हरित क्षेत्र के मुकाबले विकास योजना-2047 में इसे करीब 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। भानपुर खंती के पुनर्विकास के लिए गोल्फ कोर्स का प्रस्ताव है, जबकि कॉलोनी स्तर पर खुले क्षेत्र को 10 से बढ़ाकर 12 प्रतिशत करने की योजना है।
इसके साथ ही डिजिटल ट्विन सिटी, मल्टीलेवल और मैकेनाइज्ड पार्किंग, बेहतर यातायात व्यवस्था और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान भी ड्राफ्ट में शामिल हैं। शिक्षा और रोजगार के लिहाज से भौंरी क्षेत्र में एजुकेशन नॉलेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी म्ज्ञ।प् सिटी विकसित करने की परिकल्पना की गई है।
वहीं चैरिटेबल गतिविधियों, जैसे अनाथ आश्रम, वृद्धाश्रम, रैन बसेरा और दिव्यांग विशेष विद्यालय जैसी संस्थाओं को प्रोत्साहन देने के प्रावधान भी प्रस्तावित किए गए हैं। प्रस्तावित योजना का निवेश क्षेत्र करीब 1016.90 वर्ग किलोमीटर बताया गया है, जिसमें 254 गांव शामिल हैं और करीब 45 लाख की अनुमानित आबादी के लिए योजना तैयार की गई है।



