MP: मोहन कैबिनेट में UCC मसौदे को मंजूरी, जगदीशपुर बना ऐतिहासिक फैसले का गवाह

मध्य प्रदेश की राजनीति में आज एक ऐसा फैसला हुआ, जो सिर्फ कानून या सरकार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इतिहास, विरासत और सियासत तीनों को एक साथ जोड़ गया। भोपाल के पास स्थित ऐतिहासिक जगदीशपुर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में समान नागरिक संहिता यानी UCC के मसौदे को मंजूरी दे दी गई। यही नहीं यह वही जगदीशपुर है, जिसने 308 साल बाद अपनी ऐतिहासिक पहचान वापस पाई और अब पहली बार यहां हुई कैबिनेट बैठक ने इसे प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। आखिर क्यों चुना गया जगदीशपुर…? क्या है इस फैसले के राजनीतिक और ऐतिहासिक मायने…?
भोपाल से करीब 12 किलोमीटर दूर स्थित ऐतिहासिक जगदीशपुर शनिवार को मध्य प्रदेश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में यहां आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में समान नागरिक संहिता यानी UCC के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी गई। इस फैसले के साथ जगदीशपुर कैबिनेट बैठक इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई। सरकार का कहना है कि, प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
लेकिन यह बैठक सिर्फ तक सीमित नहीं रही, सरकार ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि, डेस्टिनेशन कैबिनेट केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का अभियान है। प्रदेश में अब तक अलग-अलग ऐतिहासिक, धार्मिक और जनजातीय क्षेत्रों में कैबिनेट बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं, और जगदीशपुर इस श्रृंखला की आठवीं डेस्टिनेशन कैबिनेट बना। जगदीशपुर अपनी ऐतिहासिक धरोहरों के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां मौजूद गोंड महल, रानी महल और चमन महल मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण पुरातात्विक धरोहरों में शामिल हैं।
जगदीशपुर का नाम वर्ष 2023 में सबसे ज्यादा चर्चा में आया था, जब तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान ने इस्लामनगर का नाम बदलकर फिर से जगदीशपुर करने की घोषणा की थी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी डेस्टिनेशन कैबिनेट की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए साफ संदेश दिया है कि, सरकार प्रदेश की विरासत को विकास से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। यानी जगदीशपुर की यह कैबिनेट केवल प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि इतिहास, राजनीति और विकासकृतीनों का संगम बन गई।



