MP: दतिया में फिर उपचुनाव की आहट, MLA घनश्याम सिंह की विधायकी पर संकट

दतिया में एकबार फिर उपचुनाव होने की आहट सुनाई देने लगी है। राजेंद्र भारती के बाद अब नए नवेले विधायक घनश्याम सिंह की कुर्सी पर संकट के बादल मंडरा रहे है. विधायक घनश्याम सिंह की विधायकी को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है! मामला 35 साल पुराने उस चक्का जाम से जुड़ा है, जो राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में हुआ था। आरोप है कि इस मामले में दर्ज FIR की जानकारी हालिया चुनावी एफिडेविट में नहीं दी गई। अब बीजेपी नेता और एडवोकेट दीपक बेलपत्री की याचिका के बाद घनश्याम सिंह की विधायकी पर कानूनी बहस शुरू हो गई है।
दतिया विधायक घनश्याम सिंह की विधायकी को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी हलचल तेज हो गई है। बीजेपी नेता और एडवोकेट दीपक बेलपत्री ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर घनश्याम सिंह की विधायकी को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 1991 के चक्का जाम मामले में दर्ज FIR की जानकारी चुनावी एफिडेविट में नहीं दी गई।
मामला उस दौर का है, जब 21 मई 1991 को राजीव गांधी की हत्या के बाद दतिया में विरोध प्रदर्शन और चक्का जाम हुआ था। दावा है कि झांसी चुंगी और किला चौक सहित कई स्थानों पर हुए चक्का जाम को लेकर 22 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी। आरोपों के मुताबिक, इस FIR में घनश्याम सिंह सहित कई लोगों के नाम शामिल थे। अब इसी पुराने मामले को लेकर चुनावी एफिडेविट में जानकारी दिए जाने पर सवाल खड़े किए गए हैं।
फिलहाल, ये आरोप हैं और मामले पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा। कुल मिलाकर दतिया की सियासत में पुरानी FIR की नई एंट्री और विधायक की कुर्सी पर कानूनी संकट ! अब इस पूरे मामले की अगली तस्वीर अदालत की सुनवाई और उसके फैसले से साफ होगी।



