MP: आदिवासी वोट पर कांग्रेस का फोकस?, बालाघाट में राहुल गांदी के दौरे के क्या हैं मायने, जानिए

चुनाव उत्तर प्रदेश में है लेकिन राहुल गांधी के फोकस में मध्य प्रदेश क्यों है? सिर्फ 12 दिन में MP के दो दौरे। पहले इंदौर में छात्रों की गूंज और अब बालाघाट के जगला गांव में बैगा आदिवासी परिवारों के बीच राहुल गांधी। बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला मई से सामने आ रहा था, लेकिन राहुल गांधी अक्टूबर में यहां आए, तो सवाल यही है – MP में ऐसा क्या है, जिस पर कांग्रेस का राष्ट्रीय नेतृत्व लगातार फोकस कर रहा है? क्या 2027 के पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव से पहले आदिवासी बेल्ट में कांग्रेस अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा रही है?
मध्य प्रदेश , कांग्रेस के लिए फिर से राष्ट्रीय राजनीति के फोकस में नजर आ रहा है। राहुल गांधी ने 1 अक्टूबर को बालाघाट के जगला गांव पहुंचकर बीमारी से बच्चों को खोने वाले बैगा आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। आसपास के गांवों से करीब 1500 लोग भी वहां पहुंचे। दिलचस्प बात ये है कि पिछले करीब 12 दिनों में राहुल गांधी का ये मध्य प्रदेश का दूसरा दौरा है। इससे पहले 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों और आदिवासी युवाओं के मुद्दे उठाए थे। यानी सवाल सिर्फ बालाघाट के दौरे का नहीं… सवाल ये है कि उत्तर प्रदेश में चुनावी तैयारी के बीच मध्य प्रदेश राहुल गांधी के एजेंडे में इतना ऊपर क्यों दिखाई दे रहा है?
बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला कई महीनों से चर्चा में था। राहुल गांधी ने सितंबर में संसद में भी इस मुद्दे को उठाया और फिर सीधे प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचे। राजनीतिक तस्वीर देखें तो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार पहले ही प्रभावित इलाकों का दौरा कर चुके थे। लेकिन अब राष्ट्रीय नेतृत्व की मौजूदगी से बालाघाट का मुद्दा प्रदेश की राजनीति से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में आ गया है। इसके पीछे मध्य प्रदेश का आदिवासी राजनीतिक भूगोल भी अहम माना जाता है।
राज्य की करीब 21 प्रतिशत आबादी वर्ग से है और विधानसभा की 47 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं। महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ की सीमा से लगा ये इलाका आदिवासी बहुल क्षेत्र में आता है। ऐसे में यहां उठने वाला मुद्दा सिर्फ एक जिले तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आसपास के आदिवासी क्षेत्रों में भी राजनीतिक संदेश देता है। तस्वीर साफ है चुनाव भले ही उत्तर प्रदेश में हो, लेकिन मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की लगातार मौजूदगी ने सियासी सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। नजर 2027 के नगरीय निकाय और पंचायत चुनावों पर भी रहेगी… क्योंकि 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले ये चुनाव मध्य प्रदेश की सियासत में अहम राजनीतिक परीक्षा माने जाते हैं।



